युद्ध रोकने की क्षमता से आएगी शांति : राजनाथ
युद्ध रोकने की क्षमता से आएगी शांति : राजनाथ
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युद्ध रोकने की क्षमता से आएगी शांति : राजनाथ

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- भारत अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए दृढ़, चाहे वह बलिदान ही क्यों न हो - 'नेबरहुड फर्स्ट' के तहत भारत ने सभी मित्र पड़ोसियों से सम्बन्ध सुधारे नई दिल्ली, 05 नवम्बर (हि.स.)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कहा कि भारत ने कई सिद्धांतों के आधार पर अपनी सुरक्षा नीति में भारी बदलाव किये हैं, जो मजबूत, कानूनी और नैतिक रूप से स्थायी कार्यों के लिए उन्मुख हैं। युद्ध रोकने की क्षमता के माध्यम से ही शांति सुनिश्चित की जा सकती है। भारत एकपक्षीयता और आक्रामकता के सामने अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए दृढ़ है, चाहे वह बलिदान ही क्यों न हो। भारत अपनी सीमाओं पर अन्य चुनौतियों का सामना कर रहा है फिर भी हमारा मानना है कि मतभेद विवाद नहीं बनने चाहिए। हम बातचीत के माध्यम से मतभेदों के शांतिपूर्ण समाधान को महत्व देते हैं। रक्षा मंत्री आज नेशनल डिफेंस कॉलेज (एनडीसी) के डायमंड जुबली के अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने राष्ट्र के प्रति समर्पित सेवा के 60 वर्ष पूरा करने पर कमांडेंट और एनडीसी कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि एनडीसी ने न केवल भारत से बल्कि कई मित्र देशों से भी कई रणनीतिक नेताओं को तैयार किया है। पूर्व छात्रों में से कुछ अपने देशों के प्रमुख बनने की कतार में हैं और कई अपने संबंधित क्षेत्रों में जिम्मेदारी के प्रमुख पदों पर काबिज हैं। मुझे यकीन है कि आप सभी जिन देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं, उनके वर्तमान और भविष्य के नेता के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ने पाकिस्तान को छोड़कर सभी पड़ोसियों के साथ अपने संबंधों में सुधार किया है। हमने अपने मित्रों की मदद के लिए आपसी-सम्मान और आपसी-हित के संबंध बनाने के लिए भारी निवेश किया है। हमने प्रगतिशील और समान विचारधारा वाले देशों के साथ काम करके न केवल पाकिस्तान की आतंकवादी नीतियों को उजागर किया है, बल्कि अब उसके लिए आतंक का व्यवसाय जारी रखना कठिन होता जा रहा है। भारत की विदेश और सुरक्षा नीति के सबसे महत्वपूर्ण तत्वों में से एक 'नेबरहुड फर्स्ट' पहल है। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत को अधिक आत्मनिर्भर बनाने के लिए रक्षा निर्माण क्षेत्र में 'मेक इन इंडिया' के बारे में उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है और आगे जरूरत पड़ने पर इसमें बदलाव भी किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में भारत का प्रभाव बढ़ रहा है इसलिए हमें उन भारतीय नागरिकों की सुरक्षा करने में सक्षम होना चाहिए जो अब दुनिया भर में काम करते हैं। व्यापार मार्गों, संचार की शिपिंग लाइनों, मछली पकड़ने के अधिकारों और संचार नेटवर्क को सुरक्षित करने के लिए हमारे हितों को भी वैश्विक प्रयासों में योगदान करने की आवश्यकता है, ताकि खुले और मुक्त महासागर बनाए जा सकें। उन्होंने कहा कि भारत ने समान विचारधारा वाले लोगों के साथ घनिष्ठ संबंधों और साझेदारी को बढ़ावा दिया है ताकि साझा हितों को आगे बढ़ाया जा सके। अमेरिका के साथ हमारी रणनीतिक साझेदारी पहले से कहीं अधिक मजबूत है। इसी तरह जून 2020 में ऑस्ट्रेलिया के साथ आभासी शिखर सम्मेलन ने हमारी पहले से ही मजबूत रणनीतिक साझेदारी के लिए एक उत्साह प्रदान किया है। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत के रूस के साथ भी मजबूत, पारंपरिक और गहरे संबंध हैं। दोनों देशों ने निकट समझ और एक-दूसरे की चिंताओं और हितों की सराहना के माध्यम से अतीत में कई चुनौतियों का सामना किया है। फ्रांस और इजराइल जैसे विश्वसनीय दोस्तों के साथ भारत ने विशेष साझेदारी की है और भविष्य में भी जारी रखेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया, दक्षिण पूर्व और पूर्वी एशिया में अपने सहयोगी देशों तक पहुंचने में विशेष रुचि ली है। हमने पश्चिम में सऊदी अरब, यूएई और ओमान के साथ और पूर्व में इंडोनेशिया, वियतनाम और दक्षिण कोरिया के साथ अपने संबंधों के दायरे और गुणवत्ता को बढ़ाया है। भारत की स्थिरता और सुरक्षा से ही आर्थिक रूप से बढ़ने की क्षमता भी जुड़ी है। रक्षा मंत्री ने कहा कि देश के पिछले छह साल राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति भारत के अगले दशक के दृष्टिकोण का खाका खींचते हैं। इसमें पहला भारत की क्षेत्रीय अखंडता, बाहरी खतरों और आंतरिक चुनौतियों से संप्रभुता को सुरक्षित करने की क्षमता है। दूसरा, भारत की आर्थिक वृद्धि को सुविधाजनक बनाने के साथ ही राष्ट्र निर्माण के लिए संसाधन तैयार करना और व्यक्तिगत आकांक्षाओं को पूरा करना है। तीसरा, सीमाओं से परे अपने हितों की रक्षा करने की क्षमता पैदा करना और आखिर में परस्पर दुनिया में देश के सुरक्षा हितों को आपस में जोड़ा गया है। हिन्दुस्थान समाचार/सुनीत/रामानुज-hindusthansamachar.in