मौजूदा 10-15 प्रतिशत रेलवे स्टेशनों पर लगाया जा सकता है यूजर चार्ज
मौजूदा 10-15 प्रतिशत रेलवे स्टेशनों पर लगाया जा सकता है यूजर चार्ज
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मौजूदा 10-15 प्रतिशत रेलवे स्टेशनों पर लगाया जा सकता है यूजर चार्ज

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नई दिल्ली, 17 सितम्बर (हि.स.)। रेल यात्रियों को सार्वजनिक निजी साझेदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित स्टेशनों के साथ-साथ देश के प्रमुख व भीड़भाड़ वाले स्टेशनों में से 10 से 15 प्रतिशत स्टेशनों पर यूजर चार्ज देना पड़ सकता है। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत और रेलवे बोर्ड के सीईओ और चेयरमैन विनोद कुमार यादव ने गुरुवार को रेलवे स्टेशनों के पुनर्निर्माण और यात्री ट्रेनों को लेकर अगले पांच सालों के रोड मैप पर संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी। नई दिल्ली और मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनल का पीपीपी मॉडल के तहत कायाकल्प कर इन्हें वैश्विक स्तर का बनाया जाएगा। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने अपील की कि देश-विदेश के निजी कंपनियां इस बोली प्रक्रिया में हिस्सा लें। विनोद यादव ने कहा कि सार्वजनिक निजी साझेदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित किये जाने वाले रेलवे स्टेशनों के साथ-साथ 10 से 15 प्रतिशत ऐसे रेलवे स्टेशनों पर भी यात्रियों को उपयोग शुल्क देना होगा जिनका पुनर्विकास नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देशभर में लगभग सात हजार रेलवे स्टेशन ऐसे हैं जहां जहां यात्रियों की आवाजाही अधिक है अथवा निकट भविष्य में बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में इनमें से 10 से 15 प्रतिशत स्टेशनों पर यूजर चार्ज लगाया जा सकता है। यादव ने कहा कि रेलवे का निजीकरण नहीं कर रहे हैं बल्कि निजी कंपनियां कुछ सालों के लिए रेलगाड़ियों का संचालन करेंगी। उन्होंने कहा कि इससे तकनीक और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि अगले पांच साल में 13.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना है। मार्च 2024 तक मांग के हिसाब से यात्री और माल ट्रेनें चला पाये उस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि पीपीपी मॉडल की इस नई पहल से यात्री व्यवसाय में भारी मांग की संभावना है। उन्होंने कहा कि रेलवे में निजी क्षेत्र का निवेश लगभग 30,000 करोड़ रुपये का है। कांत ने कहा कि यह देश में अपनी तरह की पहली पहल है, जिसमें निजी इकाइयां यात्री व्यवसाय के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी गाड़ियों का संचालन करेंगी। हिन्दुस्थान समाचार/सुशील-hindusthansamachar.in