मातृभाषा, संस्कृति और प्रकृति की रक्षा तेलुगु साहित्यकार विश्वनाथ सत्यनारायण को सच्ची श्रद्धांजलि  : उपराष्ट्रपति
मातृभाषा, संस्कृति और प्रकृति की रक्षा तेलुगु साहित्यकार विश्वनाथ सत्यनारायण को सच्ची श्रद्धांजलि : उपराष्ट्रपति
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मातृभाषा, संस्कृति और प्रकृति की रक्षा तेलुगु साहित्यकार विश्वनाथ सत्यनारायण को सच्ची श्रद्धांजलि : उपराष्ट्रपति

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नई दिल्ली, 10 सितम्बर (हि.स.)। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने गुरुवार को कहा कि मातृभाषा, भारतीय संस्कृति, मूल्यों और पर्यावरण का संरक्षण और रक्षा तेलुगु साहित्यकार विश्वनाथ सत्यनारायण को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। विश्वनाथ साहित्य पीठम् द्वारा आयोजित कवि सम्राट विश्वनाथ सत्यनारायण की 125वीं जयंती समारोह का उद्घाटन करते हुए नायडू ने साहित्यिक प्रतिभा को भारतीय संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक बताया। यह बताते हुए कि विश्वनाथ सत्यनारायण रामायण को एक सच्चा तेलुगु रूप प्रदान करने वाले पहले लेखक हैं, उन्होंने याद किया कि विश्वनाथ के मौलिक कार्य ‘रामायण कल्पवृक्ष’ ने उन्हें प्रतिष्ठित ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ दिलाया था। नायडू ने प्रकृति के संरक्षण को जन-आंदोलन में परिवर्तित करने का भी आह्वान किया। इस बात को ध्यान में रखते हुए कि मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने से बच्चों के भावनात्मक और बौद्धिक विकास में मदद मिलेगी, उन्होंने बल देकर कहा कि संस्कृति, भाषा और परंपराओं के एकीकृत होने पर बच्चे समग्र रूप से शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। यह बताते हुए कि नई शिक्षा नीति-2020 में एकीकृत शिक्षा को प्राथमिकता दी गई है। नायडू ने बल देकर कहा कि एनईपी-2020 को छात्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों वाले कौशल और ज्ञान से भी परिपूर्ण किया गया है, जिससे वे 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो सकें। उपराष्ट्रपति ने विश्वनाथ को उद्धृत करते हुए यह भी कहा कि परिपक्वता के साथ मातृभाषा में प्राप्त की गई शिक्षा से कोई भी व्यक्ति अन्य भाषाओं को आसानी से सीख सकता है। नायडू ने कहा कि विश्वनाथ का साहित्यिक कैनवास उपन्यास, महत्वपूर्ण कार्यों, कविताओं, महाकाव्यों, नाटकों, गीतों और छंदों सहित अन्य को शामिल करते हुए बहुत बड़ा था। उन्होंने कहा कि कई प्रमुख तेलुगु साहित्यकारों ने श्री विश्वनाथ सत्यनारायण से प्रेरणा प्राप्त की है। इस वेबिनार में आंध्र प्रदेश विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष, मंडली बुद्ध प्रसाद, प्रख्यात आध्यात्मिक प्रचारक, सामवेद सन्मुख शर्मा, विश्वनाथ साहित्य पीठम् के अध्यक्ष, विश्वनाथ सत्यनारायण एवं अन्य विख्यात हस्तियों ने हिस्सा लिया। हिन्दुस्थान समाचार/सुशील-hindusthansamachar.in