भारत सरकार कृषि क्षेत्र को निवेश के अवसर में बदलने के लिए प्रतिबद्ध:   तोमर
भारत सरकार कृषि क्षेत्र को निवेश के अवसर में बदलने के लिए प्रतिबद्ध: तोमर
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भारत सरकार कृषि क्षेत्र को निवेश के अवसर में बदलने के लिए प्रतिबद्ध: तोमर

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- कनाडा की मंत्री बीबू ने की वैज्ञानिक व तकनीकी विशेषज्ञता में मदद की पेशकश नई दिल्ली, 06 अक्टूबर (हि. स.)। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हाल ही में घोषित अनेक पहलों में वन नेशन-वन मार्केट की स्थापना के लिए नीतिगत सुधार, 86 प्रतिशत छोटे व सीमांत किसानों सहित अपने किसानों की सुरक्षा के उचित उपायों के साथ संविदा कृषि और एक लाख करोड़ रू. का एग्री इंफ्रा फंड शामिल हैं। भारत ऑनलाइन मार्केटप्लेस व स्मार्ट एग्रीकल्चर के लिए महत्वपूर्ण प्रावधानकर्ता के रूप में डिजिटल एग्री-स्टैक विकसित कर रहा हैं। सरकार कृषि क्षेत्र को निवेश अवसर में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है। तोमर ने मंगलवार को विडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से इंडो-कैनेडियन बिज़नेस चेम्बर (आईसीबीसी) द्वारा भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) व भारत के विदेश मंत्रालय के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय, भारत-कनाडा एग्री-टेक वर्चुअल सेमिनार का शुभारंभ करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत ने विशेष रूप से, वैश्विक महामारी संकट के बीते छह महीनों के दौरान कृषि क्षेत्र में काफी प्रगतिशील सुधार किए हैं। इनमें 'वन नेशन-वन मार्केट' की स्थापना के लिए नीतिगत सुधार, किसानों की सुरक्षा व स्वतंत्रता के लिए उचित उपायों के साथ ही अनुबंध खेती शामिल हैं। कृषि तकनीक क्षेत्र में भारत के 450 से अधिक स्टार्ट-अप हैं, जिसका अर्थ है कि दुनिया में हर 9वां स्टार्ट-अप भारतीय है। इस क्षेत्र के अनुरूप निवेश के कारण सार्वजनिक-निजी भागीदारी बढ़ रही है। तोमर ने भारत-कनाडा के बीच कृषि-व्यापार में तेजी से वृद्धि का संकेत देते हुए कहा कि भारत, कनाडा की सब्जियों व कच्चे कृषि माल का पांचवां सबसे बड़ा आयातक देश है और लेग्युमिनस सब्जियों का सातवां सबसे बड़ा आयातक है, जिसे "शाकाहारी प्रोटीन" कहा जाता है। उन्होंने कहा कि इंडो-कैनेडियन कृषि-व्यापार में वृद्धि की काफी संभावना है। भारत पौष्टिक अनाज, ऑर्गेनिक्स, हर्बल्स आदि सहित स्वास्थ्यप्रद भोजन के उत्पादन के लिए एक उत्कृष्ट स्थान है, जो आयुर्वेद की समृद्ध परंपराओं और योग उपचार के तरीकों के वाहक हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्ष 2009 में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के बाद, वह कृषि क्षेत्र में अपनी प्राकृतिक क्षमताओं का लाभ उठाने के लिए भारत-कनाडा सहयोग को आगे बढ़ते देखना चाहते हैं। कार्यक्रम में, विशेष अतिथि कनाडा की कृषि एवं कृषि-खाद्य मंत्री मैरी-क्लॉड बीबू ने कहा कि कनाडा-भारत में कृषि और कृषि-व्यापार संबंधी मजबूत द्विपक्षीय रिश्ते है और सहयोग का गौरवपूर्ण इतिहास है। उन्होंने कहा कि भारत में तेजी से हो रहा आर्थिक विकास नई उपभोक्ता मांगों को आगे बढ़ा रहा है और कनाडा खाद्य प्रसंस्करण, खाद्य सुरक्षा तथा परिवहन बुनियादी ढांचे में वैज्ञानिक व तकनीकी विशेषज्ञता के माध्यम से भारत की तत्संबंधी मांगों को पूरा करने में मदद कर सकता है। बीबू ने उम्मीद जताई कि महामारी से उपजी स्थितियों के चलते दोनों देश अर्थव्यवस्था को ठीक करने में भी मदद करेंगे। आईसीबीसी की सीईओ नादिरा ने कहा कि आईसीबीसी दोनों देशों के बीच कृषि व कृषि-तकनीक संबंधी व्यापार के अवसरों की मैपिंग करते हुए शीघ्र ही एक श्वेत-पत्र जारी करेगा। भारत में कनाडा के हाई कमिश्नर नादिर पटेल, कनाडा में भारत के हाई कमिश्नर अजय बिसारिया समेत कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव डा. अलका भार्गव व विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव पी. हरीश भी कार्यक्रम में शामिल रहे। हिन्दुस्थान समाचार/अजीत-hindusthansamachar.in