भारत की कोरोना के खिलाफ लड़ाई अग्रसक्रिय, निर्धारित और श्रेणीकृत रही : डॉ. हर्ष वर्धन
भारत की कोरोना के खिलाफ लड़ाई अग्रसक्रिय, निर्धारित और श्रेणीकृत रही : डॉ. हर्ष वर्धन
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भारत की कोरोना के खिलाफ लड़ाई अग्रसक्रिय, निर्धारित और श्रेणीकृत रही : डॉ. हर्ष वर्धन

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-ब्रिक्स देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों की दसवीं बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने लिया हिस्सा नई दिल्ली, 11 नवम्बर (हि.स.)। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने बुधवार को बिक्स देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों की दसवीं बैठक में वीडियो कॉफ्रेंसिंग के माध्यम से हिस्सा लिया। इस मौके पर डॉ. हर्ष वर्धन ने अपने संबोधन में कहा कि ब्रिक्स में कुछ विश्व की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले देश शामिल हैं, जिनमें विश्व की जनसंख्या का लगभग 40 प्रतिशत भाग है और इसलिए इनकी वैश्विक स्वास्थ्य की स्थिति को प्रभावित करने में बड़ी भूमिका है। ये पांच देश- ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका, कई स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने, संचारी, गैर-संचारी रोगों के प्रति चिंता, स्वास्थ्य सेवाओं तक असमान पहुंच, स्वास्थ्य देखभाल की बढ़ती कीमत और अब कोरोना महामारी से निपटने के लिए काम कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों ने ब्रिक्स देशों में ऐसे कुछ महत्वपूर्ण सुधारों की यात्रा शुरू की है, जिनसे हमें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, वित्तीय राहत और सार्वभौम स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करने में मदद मिली है। डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि भारत की कोरोना के खिलाफ लड़ाई अग्रसक्रिय, निर्धारित और श्रेणीकृत रही थी। शीघ्र स्क्रीनिंग और यात्रियों के पृथकवास, लॉकडाउन लगाने तथा स्वास्थ्य सुविधाओं और कार्मिकों पर अधिक बोझ नहीं डालने के लिए कंटेनमेंट जोन बनाना, फैलाव को रोकने के लिए व्यवहार में परिवर्तन लाने को बढ़ावा देना, चरणबद्ध, सतर्क और जिम्मेदार तरीके से अर्थव्यवस्था को खोलने की आवश्यकता को महसूस करने के काम समय पर किए गए। उन्होंने कहा कि स्वेदशी उत्पादन बढ़ाने तथा स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या के विस्तार के लिए 24 घंटे कार्य किया गया, जिससे टेस्टिंग किट, पीपीई, वेंटिलेटर जैसी आदि आवश्यक वस्तुओं की मांग और आपूर्ति के अंतर को दूर किया गया। इसके अलावा हर दृष्टि में आत्म निर्भर बनने के लिए देश में आत्म निर्भर भारत अभियान भी शुरू किया गया। हमारे देश की सामूहिक शक्ति के पास पिछले दशकों में विभिन्न बीमारियों के फैलाव पर सफलतापूर्वक काबू पाने का समृद्ध अनुभव है। यह कार्य समावेशी और समान दृष्टिकोण से किया गया। ब्रिक्स देशों के 2015 के यूएफए घोषणा पत्र में जैसे कि जोर दिया गया था कि हमें अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी और ज्ञान के आदान-प्रदान, खुलेपन, एकजुटता, समानता जैसे मूल सिद्धांतों पर काम करना होगा। हिन्दुस्थान समाचार/ विजयलक्ष्मी-hindusthansamachar.in