बटला हाउस: जानकारी साझा करने के लिए प्रेसवार्ता करने से गृह मंत्रालय किया था मना : करनैल सिंह
बटला हाउस: जानकारी साझा करने के लिए प्रेसवार्ता करने से गृह मंत्रालय किया था मना : करनैल सिंह
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बटला हाउस: जानकारी साझा करने के लिए प्रेसवार्ता करने से गृह मंत्रालय किया था मना : करनैल सिंह

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नई दिल्ली, 12 सितम्बर (हि.स.)। दिल्ली में 2008 में हुए सीरियल बम ब्लास्ट मामले की जांच का नेतृत्व करने वाले स्पेशल सेल के तत्कालीन ज्वाइंट कमिश्नर करनैल सिंह के मुताबिक बटला हाउस मुठभेड़ पर कुछ जानकारी साझा करने के बाद उन्हें इस बारे में प्रेसवार्ता करने से गृह मंत्रालय ने साफ मना कर दिया गया था। उन्हें उनके तत्कालीन कमिश्नर ने कहा था कि गृह मंत्रालय की तरफ से निर्देश मिला है कि जांच में प्रगति के बारे में मीडिया को और जानकारी न दी जाए। सिंह ने 19 सितंबर 2008 को दिल्ली के जामिया नगर इलाके में हुई मुठभेड़ से जुड़ी ऐसी ही कई अन्य जानकारियां अपनी किताब “बटला हाऊस: ऐन एनकाउंटर दैट शुक द नेशन” में साझा किया है। इस मुठभेड़ में इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के दो आतंकवादी मारे गए थे। इस मुठभेड़ के दौरान बटला हाउस इलाके में पुलिस कार्रवाई का नेतृत्व करने वाले इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा शहीद हो गए थे। लेखक ने खुफिया ब्यूरो (आईबी), विभिन्न भारतीय शहरों में घटनाक्रम से जुड़े तारों, स्थानीय स्तर पर हासिल की गई खुफिया जानकारियों और मुखबिरों से मिली विभिन्न जानकारियों को एक साथ समेटते हुए मुठभेड़ की पृष्ठभूमि तैयार करने वाले घटनाक्रम का मिनट-दर-मिनट ब्योरा अपनी इस किताब में पेश किया है। मुठभेड़ के समय दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के ज्वाइंट कमिश्नर रहे सिंह ने कहा कि पुलिस द्वारा मीडिया के साथ कुछ मौकों पर जानकारियां साझा किये जाने के बाद उन्हें पुलिस कमिश्नर का एक फोन आया कि गृह मंत्रालय नहीं चाहता कि वे जांच में होने वाली प्रगति के बारे में और मीडिया ब्रीफिंग करें। उन्होंने कहा कि मेरी यह दलील थी कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता और एक पुलिस अधिकारी के तौर पर यह हमारा कर्तव्य है कि हम आतंकवादियों को पकड़ने के लिये सुराग पर काम करें, भले ही उनका धर्म कुछ भी हो। उन्होंने कहा कि वह जानते थे कि ऐसे महत्वपूर्ण मामले में मीडिया को यूं ही अलग छोड़ देने के परिणाम खतरनाक हो सकते हैं क्योंकि ऐसे में आधी-अधूरी जानकारी बाहर आएगी या फिर गलत और मनगढ़ंत खबरें आने लगेंगी। उन्होंने कहा कि मैं दावे से कह सकता हूं कि बटला हाउस मुठभेड़ आतंकवाद के खिलाफ जंग में एक ऐतिहासिक घटनाक्रम साबित हुई। रूपा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की जा रही इस किताब में सिंह ने लिखा है कि इसने आईएम को करारा झटका दिया था, क्योंकि उसके इस एनकाउंटर के बाद प्रमुख सदस्यों को काबू में किया गया और भारत में उसके नेटवर्क की कमर तोड़ दी गई थी। हालांकि हमनें अपने सबसे होशियार और बहादुर अफसरों में से एक मोहनचंद्र शर्मा को खो दिया था, जिसकी तफ्तीश से हम आईएम के मुख्य सदस्यों तक पहुंचे थे। सेवानिवृत्त इस आईपीएस अधिकारी ने कहा कि यह मुठभेड़ विवादों के घेरे में रही और इसको लेकर अलग-अलग सियासी दलों की राय भी अलग-अलग थी। दिल्ली पुलिस ने उच्च न्यायालय, सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सामने सच्चाई पेश की। देश की सर्वोच्च अदालत ने अपना फैसला सुनाया और बटला हाउस एनकाउंटर फर्जी होने के सभी आरोपों से स्पेशल सेल को मुक्त कर दिया। हिन्दुस्थान समाचार/अश्वनी-hindusthansamachar.in