फौजी बेटे को दूल्हा बना बारात निकालने वाला था पिता, अब उसी की अर्थी को कंधा देकर जलानी पड़ी चिता
फौजी बेटे को दूल्हा बना बारात निकालने वाला था पिता, अब उसी की अर्थी को कंधा देकर जलानी पड़ी चिता
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फौजी बेटे को दूल्हा बना बारात निकालने वाला था पिता, अब उसी की अर्थी को कंधा देकर जलानी पड़ी चिता

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जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान की तरफ से हुई गोलीबारी में शहीद हुए हिमाचल के वीर सपूत शहीद रोहन कुमार का शनिवार शाम पूरे सैन्य सम्मान के साथ पैतृक गांव गलोड़ खास में अंतिम संस्कार किया गया। जो पिता चार महीने बाद बेटे को दूल्हा बनाकर उसकी बारात निकालने के सपने देख रहा था, आज उसी लाचार पिता ने बेबस होकर अपने लाल की अर्थी को कंधा दिया। श्मशानघाट तक रोते-बिलखते गए घरवाले शहीद रोहिन कुमार के पार्थिव शरीर को उनके चचेरे भाई मोहित कुमार ने मुखाग्नि दी। इस दौरान कैप्टन रूपेश राठौर के नेतृत्व में सेना की टुकड़ी ने सैन्य परंपराओं के अनुसार शहीद को सलामी देते हुए अंतिम विदाई दी। सैंकड़ों लोग घर से श्मशानघाट तक शुरू हुई शहीद की अंतिम यात्रा में रोते-बिलखते शामिल हुए। जहां से भी जवान की अर्थी निकली हर कोई पीछे-पीछे उसमें शामिल होता गया। माता-पिता का इकलौता बेटा था रोहन शहीद जवान रोहन कुमार अपने परिवार का इकलौता बेटा था। उसकी एक बहन है, जिसकी शादी हो चुकी है, इसके अलावा परिवार में मां-पिता और दादी हैं। जिनका रो-रोकर बुरा हाल है। उनके आंसू नहीं पुछ रहे हैं, वह बार-बार यही बोल रहे हैं कि रोज उससे फोन पर बात होती थी। शादी को लेकर उसने कई सपने देखे थे, लेकिन सारी खुशियां गम में बदल गईं। शादी की हो चुकी थीं सारी तैयारियां शहीद रोहन के पिता रसील बताते हैं कि फरवरी में रोहिन घर छुट्टी पर आया था, इस दौरान हमने उसकी सगाई कर दी थी। नवंबर में उनकी शादी होनी थी, हम सारी तैयारियां कर चुके थे। लेकिन इस दर्दनाक खबर ने परिवार को झकझोर कर रख दिया। पिता घर चलाने के लिए करते हैं हलवाई का काम बता दें कि रोहन 2016 में भारतीय सेना की 14 पंजाब रेजीमेंट में भर्ती हुआ था। वह फिलहाल जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में तैनात था।रोहन बहुत ही साधारण परिवार से संबंध रखता था। पिता रसील सिंह घर का खर्च चलाने के लिए पंजाब के अमृतसर में हलवाई का काम करते हैं। बचपन से ही फौज में जाने का देखा था सपना शहीद रोहिन के चाचा अनिल वर्मा ने बताया कि उसने बचपन से ही फौज में जाने का सपना मन में पाले हुए थे। अब वह हमारे बीच नहीं रहा। हमें बेटे की शहादत पर गर्व है। गांव के लोग उसकी बहादुरी के किस्से जानते हैं। हेलिकॉप्टर से गांव लाई गई शहीद की पार्थिव देह शुक्रवार रात रात शहीद होने के बाद शनिवार दोपहर को शहीद रोहन की पार्थिव देह हेलिकॉप्टर के जरिए जम्मू-कश्मीर से हमीरपुर लाया गया। इसके बाद हमीरपुर के हेलीपैड से उनके पार्थिव शरीर को सैन्य वाहन में उनके पैतृक गांव गलोड़ खास ले जाया गया। इस मौके पर सेना की एक टुकड़ी और जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारी भी मौजूद रहे।-newsindialive.in