फेसबुक इंडिया के उपाध्यक्ष अजीत मोहन को जारी समन पर लगी रोक दो दिसम्बर तक बढ़ी
फेसबुक इंडिया के उपाध्यक्ष अजीत मोहन को जारी समन पर लगी रोक दो दिसम्बर तक बढ़ी
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फेसबुक इंडिया के उपाध्यक्ष अजीत मोहन को जारी समन पर लगी रोक दो दिसम्बर तक बढ़ी

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नई दिल्ली, 15 अक्टूबर (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली विधानसभा की पीस एंड हारमनी कमेटी की ओर से फेसबुक इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट अजीत मोहन को जारी किए गए समन पर लगी रोक को 2 दिसंबर तक बढ़ा दी है। इस मामले पर अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी। गुरुवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय किशन कौल ने दिल्ली विधानसभा के स्पीकर के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि हमने सोचा था कि आपने अपने मुवक्किल को बेहतर नोटिस जारी करने की सलाह दी होगी। तब सिंघवी ने कहा कि हमने बेहतर किया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली विधानसभा के हलफनामे में साफ कहा गया है कि फेसबुक के वाइस प्रेसिडेंट को गवाह के तौर पर बुलाया गया है। सिंघवी ने विधानसभा का हलफनामा पढ़कर कोर्ट को बताया। उन्होंने कहा कि अजीत मोहन के खिलाफ कोई भी निरोधात्मक कार्रवाई नहीं की गई। सिंघवी ने कहा कि अगर वे पेश नहीं होते हैं तो कमेटी स्पीकर को सूचित करेगी जिसके बाद स्पीकर विशेषाधिकार कमेटी को दे सकते हैं जो एक विशेषाधिकार नोटिस जारी कर सकती है। ये सब कुछ एक अनुमान मात्र है। उन्होंने कहा कि फेसबुक ने संसदीय कमेटी को सहयोग किया है। लेकिन अब वे कह रहे हैं कि वे दिल्ली विधानसभा की कमेटी के सामने उपस्थित नहीं होंगे। तब कोर्ट ने कहा कि ये सब समन की प्रकृति पर निर्भर करता है। अजीत मोहन की ओर से हरीश साल्वे ने कहा कि विधानसभा की कमेटी का नोटिस निरोधात्मक है। नोटिस में कहा गया है कि अजीत मोहन को चुप रहने का अधिकार नहीं है। विधानसभा कमेटी ने एक जांच कमेटी का गठन किया है जो कहता है कि आपकी हिम्मत कैसे हुई। अजीत मोहन इस कमेटी के समक्ष पेश नहीं होना चाहते हैं। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हमारा मत है कि कानून-व्यवस्था और पुलिस केंद्र सरकार के हाथ में है और उस मामले पर विधानसभा को समन जारी करने का कोई अधिकार नहीं है। तब सिंघवी ने कहा कि क्या किसी व्यक्ति को अगर कोई विधानसभा नोटिस जारी करती है तो वो विधानसभा के समक्ष उपस्थित हुए बिना ही सुप्रीम कोर्ट आकर पहले क्षेत्राधिकार पर फैसले की मांग करेगा। तब कोर्ट ने कहा कि दिल्ली का मामला अलग है। उन्होंने कहा कि बड़ी बेंच के समक्ष दिल्ली विधानसभा के अधिकार का मामला लंबित है। उसके बाद कोर्ट ने सभी पक्षों को 31 अक्टूबर तक अपनी दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने पिछले 23 सितंबर को दिल्ली विधानसभा की कमेटी की ओर से जारी समन पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार, दिल्ली विधानसभा, लोकसभा, राज्यसभा और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था। फेसबुक इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट अजीत मोहन को फरवरी महीने में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों को लेकर समन जारी किया गया है। इसके पहले दिल्ली विधानसभा की पीस एंड हारमनी कमेटी ने पिछले 10 सितंबर और 18 सितंबर को अजीत मोहन को तलब किया था, लेकिन वे पेश नहीं हुए थे। अजीत मोहन ने याचिका दायर कर कहा है कि विधानसभा की ओर से जारी ये समन संविधान की धारा 19(1)(ए) और 21 का उल्लंघन है। याचिका में दिल्ली विधानसभा की ओर से जारी समन को निरस्त करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि फेसबुक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का एक सुरक्षित प्लेटफार्म है। फेसबुक में युजर्स को आपत्तिजनक कंटेंट की रिपोर्ट करने का भी विकल्प देता है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली विधानसभा की पीस एंड हारमनी कमेटी ने फेसबुक के वाईस प्रेसिडेंट को समन भेजकर यह चेतावनी दी है कि अगर वे पेश नहीं हुए तो उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई शुरु हो सकती है हिन्दुस्थान समाचार/ संजय/वीरेन्द्र-hindusthansamachar.in