प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना और ई-गोपाला ऐप की शुरुआत
प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना और ई-गोपाला ऐप की शुरुआत
देश

प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना और ई-गोपाला ऐप की शुरुआत

news

प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल माध्यम से किया उद्घाटन नई दिल्ली 10 सितम्बर (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को डिजिटल माध्यम से प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (पीएमएमएसवाई) का शुभारम्भ किया। प्रधानमंत्री ई-गोपाला ऐप भी लॉन्च किया। यह ऐप किसानों के लिए एक समग्र नस्ल सुधार, बाजार और सूचना पोर्टल है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने बिहार में मछली पालन और पशुपालन क्षेत्रों में भी कई पहलों का शुभारम्भ किया। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि आज जितनी भी योजनाएं शुरू हुई हैं, उनके पीछे की सोच ही यही है कि हमारे गांव 21वीं सदी के भारत आत्मनिर्भर भारत की ताकत बनें, उर्जा बनें। कोशिश यही होनी चाहिए कि अब भारत में मछली पालन से जुड़े काम, डेयरी से जुड़े काम, शहर उत्पादन से जुड़े कामों को बढ़ावा दे कर गांवों को और समृद्ध और सशक्त किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं। आज देश के 21 राज्यों में इस योजना की शुरुआत हुई है। अगले 4-5 सालों में इस पर 20,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसमें आज 1700 करोड़ रुपए का काम शुरू हो रहा है। बिहार के पटना, पूर्णिया, सीतमढ़ी,मधेपुरा, किशनगंज और समस्तीपुर में अनेक सुविधाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया है। इससे मछली उत्पादकों को नया इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा, आधुनिक उपकरण मिलेंगे, नया मार्केट भी मिलेगा। देश के हर हिस्से में समंदर औऱ नदी किनारे बसे क्षेत्रों में मछली के व्यापार को, ध्यान में रखते हुए पहली बार देश में इतनी बड़ी योजना बनाई गई है। आजादी के बाद इस पर जितना निवेश हुआ, उससे भी कई गुना ज्यादा निवेश प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना पर किया जा रहा है। पीएम किसान सम्मान निधि से देश के 10 करोड़ किसानों को मिला लाभ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि से भी देश के 10 करोड़ से ज्यादा किसानों के बैंक खातों में सीधा पैसा पहुंचाया गया है। इसमें करीब 75 लाख किसान बिहार के भी हैं। अबतक करीब 6 हजार करोड़ रुपये बिहार के किसानों के बैंक खातों में जमा हो चुके हैं। इस बात पर बहुत जोर दिया जा रहा है कि मुफ्त राशन की योजना और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान का लाभ बिहार के हर जरुरतमंद साथी तक पहुंचे, बाहर से गांव लौटे हर श्रमिक परिवार तक पहुंचे । पशुओं की अच्छी नस्ल के साथ ही उनकी देखरेख और उसको लेकर सही वैज्ञानिक जानकारी भी उतनी ही जरूरी है। इसलिए बीते सालों में तकनीक का निरंतर प्रयोग किया जा रहा है। ई गोपाला ऐप की शुरुआत प्रधानमंत्री ने कहा कि इसी कड़ी में ई-गोपाला ऐप की शुरुआत की गई है। ई गोपाला ऐप के माध्यम से पशुपालकों को उन्नत पशुधन को चुनने में आसानी होगी। उनको बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी। ये ऐप पशुपालकों को उत्पादकता से लेकर उसके स्वास्थ्य और आहार से जुड़ी तमाम जानकारियां देगा। उन्होंने कहा कि भारत उस स्थिति की तरफ बढ़ रहा है, जब गांव के पास ही ऐसे क्लस्टर बनेंगे, जहां फूड प्रोसेसिंग से जुड़े उद्योग भी लगेंगे और पास ही उससे जुड़े रिसर्च सेंटर भी होंगे यानी एक तरह से कह सकते हैं – जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान। बिहार के फल, चाहे वो लीची हो, जर्दालू आम हो, आवंला या मखाना हो या फिर मधुबनी पेंटिंग्स हों, ऐसे अनेक प्रोडक्ट बिहार के जिले-जिले में है। हमें इन लोकल प्रोडक्ट्स के लिए ज्यादा वोकल होना है। हम लोकल के लिए जितना वोकल होंगे, उतना ही बिहार आत्मनिर्भर बनेगा। क्या है प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (पीएमएमएसवाई) मत्स्य क्षेत्र पर केन्द्रित और सतत विकास योजना है, जिसे आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत वित्त वर्ष 2020-21 से वित्त वर्ष 2024-25 तक पांच साल की अवधि के दौरान सभी राज्यों/ संघ शासित प्रदेशों में कार्यान्वित किया जाना है। इस पर अनुमानित रूप से 20,050 करोड़ रुपये का निवेश होना है। पीएमएमएसवाई के अंतर्गत 20,050 करोड़ रुपये का निवेश मत्स्य क्षेत्र में होने वाला सबसे ज्यादा निवेश है। इसमें से लगभग 12,340 करोड़ रुपये का निवेश समुद्री, अंतर्देशीय मत्स्य पालन और जलीय कृषि में लाभार्थी केन्द्रित गतिविधियों पर तथा 7,710 करोड़ रुपये का निवेश फिशरीज इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए प्रस्तावित है। पीएमएमएसवाई के उद्देश्यों में 2024-25 तक मछली उत्पादन अतिरिक्त 70 लाख टन बढ़ाना, 2024-25 तक मछली निर्यात से आय 1,00,000 करोड़ रुपये तक करना, मछुआरों और मत्स्य किसानों की आय दोगुनी करना, पैदावार के बाद नुकसान 20-25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करना तथा मत्स्य पालन क्षेत्र और सहायक गतिविधियों में 55 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करना शामिल हैं। पीएमएमएसवाई को मछली उत्पादन और उत्पादकता, गुणवत्ता प्रौद्योगिकी, उपज के बाद के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे और प्रबंधन, मूल्य निर्धारण श्रृंखला के आधुनिकीकरण और सुदृढ़ीकरण, मजबूत मत्स्य प्रबंधन ढांचे और मछुआरों के कल्याण के रास्ते में आने वाली कमियों को दूर करने के उद्देश्य से बनाया गया है। क्या है ई-गोपाला ऐप ई-गोपाला ऐप किसानों के प्रत्यक्ष उपयोग के लिए एक समग्र नस्ल सुधार, बाज़ार और सूचना पोर्टल है। वर्तमान में देश में पशुधन का प्रबंधन करने वाले किसानों के लिए ऐसा कोई डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध नहीं है, जहां सभी रूपों (वीर्य, भ्रूण, आदि) में रोग मुक्त जीवाणु (जर्मप्लाज्म) खरीदना और बेचना, गुणवत्तापूर्ण प्रजनन सेवाओं की उपलब्धता (कृत्रिम गर्भाधान, पशु प्राथमिक चिकित्सा, टीकाकरण, उपचार आदि) और पशु पोषण के लिए किसानों का मार्गदर्शन करना, उचित आयुर्वेदिक दवा/एथनो पशु चिकित्सा दवा का उपयोग करते हुए जानवरों का उपचार आदि की जानकारी मिलती हो। पशु किसानों को अलर्ट भेजने (टीकाकरण, गर्भावस्था निदान आदि के लिए नियत तारीख पर) या उन्हें क्षेत्र में विभिन्न सरकारी योजनाओं और अभियानों के बारे में सूचित करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। ई-गोपाला ऐप इन सभी पहलुओं पर किसानों को समाधान प्रदान करेगा। बिहार के पूर्णिया में ‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ बिहार सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई 75 एकड़ भूमि पर 84.27 करोड़ रुपये के निवेश से यह केंद्र स्थापित किया गया है। यह सरकारी क्षेत्र के सबसे बड़े वीर्य केंद्रों में से एक है, जिसकी उत्पादन क्षमता 50 लाख वीर्य खुराक प्रति वर्ष है। यह वीर्य केंद्र बिहार की स्वदेशी नस्लों के विकास एवं संरक्षण को भी नया आयाम देगा और इसके साथ ही पूर्वी एवं पूर्वोत्तर राज्यों की वीर्य खुराक की मांग को पूरा करेगा। शत-प्रतिशत अनुदान सहायता के जरिए देश भर में कुल 30 ईटीटी और आईवीएफ लैब (प्रयोगशालाएं) स्थापित की जा रही हैं। ये लैब देशी नस्लों के बेहतरीन पशुओं का वंश बढ़ाने और इस प्रकार दूध उत्पादन एवं उत्पादकता को कई गुना बढ़ाने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत कृत्रिम गर्भाधान में लिंग पृथक्कृत वीर्य का उपयोग ‘एआई’ में लिंग पृथक्कृत वीर्य के उपयोग के जरिए केवल मादा बछिया का ही जन्म सुनिश्चित किया जा सकता है (90% से भी अधिक सटीकता के साथ)। इससे देश में दूध उत्पादन की वृद्धि दर को दोगुना करने में मदद मिलेगी। इससे अत्यंत तेज दर से अधिक प्रजनन क्षमता वाली पशुओं की संख्या को कई गुना बढ़ाने की प्रौद्योगिकी का प्रचार-प्रसार होगा, क्योंकि इस प्रौद्योगिकी के उपयोग के जरिए वे एक वर्ष में 20 बछड़ों को जन्म दे सकती हैं। हिन्दुस्थान समाचार/ विजयलक्ष्मी-hindusthansamachar.in