प्रख्यात कला संस्कृति मर्मज्ञ कपिला वात्स्यान का निधन
प्रख्यात कला संस्कृति मर्मज्ञ कपिला वात्स्यान का निधन
देश

प्रख्यात कला संस्कृति मर्मज्ञ कपिला वात्स्यान का निधन

news

नई दिल्ली, 16 सितम्बर (हि.स.)। विख्यात कला संस्कृति मर्मज्ञ कपिला वात्स्यायन का बुधवार को दिल्ली में निधन हो गया। वह 92 वर्ष की थीं। उनके कार्यों के चलते उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया था। कपिला वात्स्यायन ने स्वतंत्रता के बाद से देश में कला, साहित्य एवं संस्कृति को प्रोत्साहन देने के लिए अनथक प्रयास किया तथा इससे जुड़े संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र की अध्यक्ष रही हैं। वह संगीत नाटक अकादमी और इंडिया इन्टरनेशनल सेंटर से भी जुड़ी थी। दिल्ली में 25 दिसम्बर 1928 को जन्मीं विदुषी कपिला वात्स्यायन ने सोमवार सुबह 9 बजे गुलमोहर एनक्लेव स्थित उनके निवास पर अंतिम सांस ली। वह हिंदी के दिवंगत साहित्यकार सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' की पत्नी थीं। साठ के दशक से वह अपने पति से अलग होकर एकाकी जीवन व्यतीत कर रही थीं। संयुक्त राष्ट्र की शिक्षा संस्कृति संबंधित संस्था यूनेस्को ने कपिला वात्स्यान के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि कला जगत में उनका योगदान अविस्मर्णीय है। यूनेस्को ने संस्था के साथ उनके जुड़ाव का भी उल्लेख किया। उनके निधन पर समाज जीवन से जुड़ी बड़ी हस्तियों ने शोक व्यक्त किया है। डॉ. वात्स्यायन को डॉ. एस. राधाकृष्णन, डॉ. जाकिर हुसैन, पंडित जवाहरलाल नेहरू, डॉ. केएल श्रीमाली, प्रो. वीकेआरवी राव, डॉ. सी. डी. देशमुख, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, डॉ. कर्ण सिंह और प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तथा राजीव गांधी जैसी बड़ी हस्तियों के साथ काम करने का मौका मिला। उन्हें 1955 भारत सरकार से पद्म भूषण, 1966 में सामुदायिक नेतृत्व के लिए रेमन मैग्सेसे, 1974 में संगीत नाटक अकादमी का आजीवन उपलब्धि पुरस्कार, रत्न सदस्य, 1977 में हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए यूनेस्को पुरस्कार और 1987 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। हिन्दुस्थान समाचार/अनूप/सुनीत-hindusthansamachar.in