पेड़ों को उखाड़ फेंकने के लिए हम लालायित रहते हैं, अब ऑक्सीजन के लिए तरस रहे हैं

पेड़ों को उखाड़ फेंकने के लिए हम लालायित रहते हैं, अब ऑक्सीजन के लिए तरस रहे हैं
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बोतल में आम ‘माजा’ है नाम। भले ही यह स्लोगन व्यवसायिक हो, लेकिन इसमें कई निहितार्थ छिपे हुए हैं। कोरोना महामारी के दौर में तो यह 'स्लोगन’ और भी सामायिक हो जाता है। ठीक वैसे ही जैसे अक्सर यह कहा जाता है ‘जैसा खाएं अन्न, वैसा बने मन।’ या फिर क्लिक »-www.prabhasakshi.com

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