निशंक गुरुवार को लॉन्च करेंगे महर्षि भारद्वाज बौद्धिक सम्पदा शिक्षा अभियान
निशंक गुरुवार को लॉन्च करेंगे महर्षि भारद्वाज बौद्धिक सम्पदा शिक्षा अभियान
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निशंक गुरुवार को लॉन्च करेंगे महर्षि भारद्वाज बौद्धिक सम्पदा शिक्षा अभियान

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- डॉ. कलाम की जयंती पर शिक्षा मंत्रालय के नवप्रवर्तन प्रकोष्ठ की अनूठी पहल नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक गुरुवार को पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती के मौके पर शिक्षा मंत्रालय की नई पहल के अंतर्गत 'महर्षि भारद्वाज बौद्धिक सम्पदा शिक्षा अभियान' को लॉन्च करेंगे। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने 15 से 23 अक्टूबर के बीच के सप्ताह को ‘बौद्धिक संपदा शिक्षा अभियान’ के रूप में मनाने का फैसला लिया है। इस मौके पर नवाचार संस्थान परिषद इंस्टीच्यूट ऑफ इनोवेशन काउंसिल (आईआईसी 2.0) के वार्षिक प्रदर्शन की रेटिंग जारी करेगी और संस्थान आईआईसी 3.0 की लॉन्चिंग भी करेगी। उल्लेखनीय है कि 15 अक्टूबर को महान वैज्ञानिक और ‘मिसाइलमैन’ के नाम से मशहूर पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कमाल की जयंती है। भारत रत्न डॉ कलाम ‘नवप्रवर्तन’ के प्रबल पक्षधर रहे हैं। इस अवसर पर 'महर्षि भारद्वाज बौद्धिक सम्पदा शिक्षा अभियान' को लॉन्च किया जाएगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का ‘नवप्रवर्तन प्रकोष्ठ’ बौद्धिक संपदा के अधिकार के लिए ये पहल कर रहा है। बौद्धिक संपदा से मतलब किसी व्यक्ति की अपनी सृजनात्मकता से विशेष अवधि के लिए अधिकार कायम करना है। इस मौके पर आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ होंगे। शिक्षा राज्य मंत्री संजय धोत्रे, मंत्रालय के उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे, पेटेंट, डिजाइंस और ट्रेडमार्क के कंट्रोलर जनरल ओपी गुप्ता, एमआईटीसी के अध्यक्ष डॉ अनिल सहस्त्रबुद्धे, एमआईटीसी के उपाध्यक्ष डॉ एमपी पुनिया और डॉ अभय जेरे गण्यमान्य अतिथियों को संबोधित करेंगे। शिक्षा मंत्रालय के नव प्रवर्तन प्रकोष्ठ की ओर से ‘बौद्धिक सम्पदा शिक्षा अभियान’ पर प्रस्तुति दी जाएगी। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीआई) के अध्यक्ष प्रो. अनिल डी. सहस्त्रबुद्धे ने कहा है कि एआईसीटीई और एमआईसी स्टार्ट अप संस्कृति को बढ़ावा दे रही है। इससे समाज के लोगों के लिए नए अवसर सृजित होंगे। इन संस्थानों से रोजगार चाहने वालों के लिए नए नौकरियों का सृजन करने वाले निकलेंगे। एआईसीटीई के उपाध्यक्ष डॉ. एमपी पुनिया ने कहा है कि उच्च शिक्षा संस्थान में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को नवाचार के आंदोलन में सबसे आगे रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज सबसे ज्यादा जरूरी है कि भारतीय उच्च शिक्षा संस्थान पूरी दुनिया में उच्च स्तर का अनुसंधान और नवाचार के लिए उत्कृष्टता केंद्र के रूप में उभरें। शिक्षा मंत्रालय के ‘नव प्रवर्तन प्रकोष्ठ” के मुख्य नवप्रवर्तन अधिकारी, डॉ. अभय जेरे ने बताया, “शिक्षा मंत्रालय के नव प्रवर्तन प्रकोष्ठ ने यह सुनिश्चित करने के लिए कई ऐसी पहल की है, जिनसे नवप्रवर्तन हमारी उच्च शिक्षा का प्राथमिक आधार बन गया है। बौद्धिक संपदा अधिकार के तहत उच्च शिक्षण संस्थाओं को आगे आना पड़ेगा और उन्हें छात्रों को नवोन्मेष और उद्यमिता का माहौल मुहैया कराना पड़ेगा। इसी के साथ उन्हें पेटेंट दायर करने की शिक्षा भी देनी होगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय में इनोवेशन सेल के निदेशक डॉ. मोहित गंभीर ने कहा कि भारत में नए आविष्कारों के लिए पेटेंट दाखिल करने वालों की संख्या काफी कम है। इसके अलावा सही जानकारी के आभाव में बड़ी संख्या में आवेदन ठीक ढंग से दायर नहीं किए जा सके हैं। इसमें सुधार करने के लिए युवाओं को पेटेंट प्रक्रिया की पूर्ण जानकारी देने की जरूरत है। डॉ. गंभीर आईआईसी 2.0 की उपलब्धियों पर नजर डालते हुए सालाना रिपोर्ट पेश करेंगे। इस अवसर पर आईआईसी 2.0 के टॉप परफॉमर्स की घोषणा की जाएगी। इसके अलावा उच्च शिक्षण संस्थानों के इंस्टीट्यूट इनोवेशन सेल के लिए “मेंटर-मेंटी प्रोग्राम” का भी ऐलान किया जाएगा एवं आईआईसी 3.0 की वेबसाइट भी लॉन्च की जाएगी। देश भर से विश्वविद्यालयों के कुलपति, कालेजों के निदेशक, अध्यापक गण एवं विद्यार्थी भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। हिन्दुस्थान समाचार/सुशील-hindusthansamachar.in