नए संसद भवन और सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित
नए संसद भवन और सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित
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नए संसद भवन और सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित

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नई दिल्ली, 05 नवम्बर (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने नए संसद भवन और सरकारी इमारतों वाले सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इस दलील को खारिज करते हैं कि सेंट्रल विस्टा इलाके में कोई नया निर्माण नहीं हो सकता। विचार इस पहलू पर होगा कि क्या प्रोजेक्ट के लिए सभी कानूनी ज़रूरतों का पालन किया गया है। दिसम्बर, 2019 में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने बीस हजार करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट के लैंड यूज बदलने पर एक नोटिस के जरिये आपत्तियां मंगाई थीं। इस नोटिफिकेशन को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया है कि ये नोटिफिकेशन दिल्ली डेवलपमेंट एक्ट की धारा 11ए के तहत गैरकानूनी है। डीडीए को इसे नोटिफाई करने का अधिकार नहीं है। याचिका में कहा गया था कि यह नोटिफिकेशन दिल्ली मास्टर प्लान 2021 का उल्लंघन करता है। कोर्ट ने 29 जुलाई को इस मामले में हस्तक्षेप याचिका दाखिल करने की अनुमति दी थी। पिछले 19 जून को कोर्ट ने केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। याचिकाकर्ताओं ने पर्यावरण मंजूरी पर भी आपत्ति जताते हुए याचिका में संशोधन करने की अनुमति देने की मांग की थी। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका में संशोधन करने की अनुमति दे दी थी। सुनवाई के दौरान पिछले 30 अप्रैल को सॉलिसिटर जनरल ने कहा था कि संसद भवन बनाया जा रहा है, इसमें परेशानी की क्या बात है। याचिका राजीव सूरी ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने पिछले 20 मार्च को एक नोटिफिकेशन के जरिये सेंट्रल विस्टा के प्लान को हरी झंडी दी है। याचिका में कहा गया है कि सेंट्रल विस्टा को नोटिफाई करने का आदेश बिना सुप्रीम कोर्ट के आदेश के किया गया है। हिन्दुस्थान समाचार/संजय/सुनीत-hindusthansamachar.in