देश में नागरिकता एक तो फिर मजदूरों के लिए कहां से आया प्रवासी शब्द : आरसीपी सिंह
देश में नागरिकता एक तो फिर मजदूरों के लिए कहां से आया प्रवासी शब्द : आरसीपी सिंह
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देश में नागरिकता एक तो फिर मजदूरों के लिए कहां से आया प्रवासी शब्द : आरसीपी सिंह

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पटना, 16 सितम्बर (हि स)। कोविड-19 व सरकार की ओर से उठाए गए कदम पर राज्यसभा में चर्चा के दौरान बुधवार को जदयू सांसद आरसीपी सिंह ने कहा कि यह एक वैश्विक महामारी है। इस महामारी से लड़ रहे कोरोना वारियर्स को धन्यवाद देते हुए सांसद ने इस रोग के कारण अपनी जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी। साथ ही, रोग को मात देकर स्वास्थ्य केन्द्रों से निकले लोगों को भी उन्होंने बधाई दी। चर्चा के दौरान सांसद ने प्रवासी मजदूरों का मामला जोर-शोर से उठाया। उन्होंने अपने श्रम के जरिए किसी भी क्षेत्र के विकास में योगदान देने वाले मेहनतकश मजदूरों के लिए इस प्रकार के प्रवासी शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की। राज्यसभा में चर्चा के दौरान बार-बार प्रवासी मजदूर का मुद्दा उठाए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सांसद आरसीपी सिंह ने कहा कि इस देश में संविधान है। संविधान हमें देश में किसी भी जगह पर रहने और काम करने की आजादी देता है। अर्थव्यवस्था में पूंजी भी है, पूंजीपति भी हैं और श्रमिक भी हैं। ऐसे में केवल श्रमिकों के मामले में ही प्रवासी का मुद्दा क्यों उठाया जाता है? उन्होंने कहा कि मैं सरकार और सभी पार्टी से अनुरोध करता हूं कि प्रवासी मजदूर जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाना बंद किया जाए। सांसद ने कहा कि श्रमिकों ने उन प्रदेशों में जाकर काम किया। उनके विकास में मदद पहुंचाई। इस प्रकार की विषम परिस्थिति आने पर उन्हें प्रवासी मजदूर कह कर संबोधित किया जाता है। यह किसी भी तरह सही नहीं है। सांसद आरसीपी सिंह ने कहा कि हमारे प्रदेश बिहार की पीड़ा देखिए, वहां के लोगों ने देश के हर क्षेत्र के निर्माण के लिए कार्य किया है और दिन भर उनको प्रवासी कह कर अलग-थलग करने का प्रयास किया जाता है। हमारा देश एक है। हमारी नागरिकता एक है। ऐसे में प्रवासी शब्द कहां से आ जाता है। हम अनुरोध करते हैं कि सरकार व सभी सहयोगी पार्टी के लोग इस प्रवासी शब्द का प्रयोग बंद करें। यह शब्द अपमान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस संकट काल में बिहार ने काफी झेला है। 20.95 लाख लोगों को वापस लौटना पड़ा। सांसद ने इस मामले में तीखे स्वर में कहा कि श्रमिक जिन राज्यों में काम कर रहे थे, वे वहां की विकास की गति को बढ़ाने में अपना योगदान दे रहे थे। लेकिन, जब संकट आया तो उन्हें वहां से विदा कर दिया गया। आज जब उन्हें जरूरत महसूस होने लगी तो ट्रेन से बुला रहे हैं। प्लेन का पैसा दे रहे हैं। उन्हें यह समझना चाहिए कि विकास में केवल कैपिटल या मार्केट नहीं है। विकास में लेबर की भूमिका भी बहुत महत्वपूर्ण है। उनका भी सम्मान होना चाहिए। सांसद आरसीपी सिंह ने बिहार सरकार के कार्यों को गिनाते हुए कहा कि बाहर से आने वाले मजदूरों के लिए विशेष व्यवस्था की गई। क्वैरेंटाइन सेंटर बनाए गए। इन सेंटर में करीब 15 लाख लोग रहे। क्वैरेंटाइन सेंटर में रहने वाले एक व्यक्ति के खाने-पीने पर 15 दिन में 5300 रुपए खर्च किए गए। राज्य में भुखमरी की समस्या ना हो इसके लिए हर राशन कार्डधारी के खाते में एक-एक हजार रुपया ट्रांसफर किया गया। हमारी सरकार का लक्ष्य लोगों को मुश्किल हालात में बेहतर रखने का रहा। सांसद ने कहा कि इस कोरोना का हाल में भी मेहनतकश किसानों ने जिस प्रकार से फसल का उत्पादन किया है, उसके लिए उन्हें बधाई दी जानी चाहिए। आज का समय एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का नहीं है, सबको मिलकर इस समस्या से निपटना है। हिन्दुस्थान समाचार/मुरली/चंदा/सुनीत-hindusthansamachar.in