दिल्ली सरकार एयरपोर्ट के निकट कोरोना जांच और क्वारंटाइन सुविधा के लिए खास प्रबंध करेः हाई कोर्ट
दिल्ली सरकार एयरपोर्ट के निकट कोरोना जांच और क्वारंटाइन सुविधा के लिए खास प्रबंध करेः हाई कोर्ट
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दिल्ली सरकार एयरपोर्ट के निकट कोरोना जांच और क्वारंटाइन सुविधा के लिए खास प्रबंध करेः हाई कोर्ट

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- कोरोना के रैपिड एंटिजन टेस्ट के मुकाबले आरटी-पीसीआर टेस्ट करने पर ज्यादा जोर दें - कोरोना से ठीक हुए लोगों की तकलीफों की जांच कर उससे जुड़े एसओपी तैयार करे सरकार नई दिल्ली, 23 दिसम्बर (हि.स.)। दिल्ली हा ईकोर्ट ने ब्रिटेन से आने वाली उड़ानों को रोके जाने के केंद्र सरकार के फैसले के मद्देनजर दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वह एयरपोर्ट के पास कोरोना से जुड़े नए खतरे को देखते हुए कोरोना की जांच और क्वारंटाइन की सुविधाओं के लिए विशेष कदम उठाए। जस्टिस हीमा कोहली की अध्यक्षता वाली बेंच ने दिल्ली सरकार से कहा है कि वो कोरोना के रैपिड एंटिजन टेस्ट के मुकाबले आरटी-पीसीआर टेस्ट करने पर ज्यादा जोर दे। मामले पर अगली सुनवाई 14 जनवरी को होगी। आज बुधवार को सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने दावा किया कि कोरोना के मामलों में जिला स्तर पर गिरावट आई है। तब कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह केंद्र के निर्देश के मुताबिक आरटीपीसीआर टेस्ट करने पर ज्यादा जोर दे। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को आदेश दिया कि वह कोरोना से ठीक हुए लोगों की तकलीफों की जांच कर उससे जुड़े एसओपी तैयार करे, ताकि ऐसे लोग सामान्य जिंदगी फिर से जी सकें। सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से वकील सत्यकाम ने कहा कि जिन जिलों में मामले ज्यादा मिले हैं, उनमें वो कांटैक्ट ट्रेसिंग और कंटेंमेंट जोन बढ़ाना चाहती है। दिल्ली सरकार ने कहा कि 11 से 21 दिसम्बर के बीच 8,71,234 लोगों के टेस्ट किए गए हैं। इनमें से 4,52,428 टेस्ट आरटी-पीसीआर से कराए गए थे। पिछली 15 दिसम्बर को सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने कहा था कि वह दिल्ली में बड़ी संख्या में कोरोना के आरटी-पीसीआर टेस्ट कर रही है। दिल्ली सरकार ने बताया था कि उसने सभी मार्केट ट्रेड एसोसिएशंस को कोरोना से बचाव को लेकर जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने का आदेश दिया है। पिछली 3 दिसम्बर को दिल्ली सरकार ने कहा था कि कोरोना की वजह से पूरी दिल्ली या दिल्ली के कुछ हिस्सों में फिलहाल नाइट कर्फ्यू लगाने की कोई योजना नहीं है। दिल्ली सरकार ने स्टेटस रिपोर्ट दायर कर ये बताया था कि वह कोरोना से निपटने के लिए हरसंभव कदम उठा रही है। स्टेटस रिपोर्ट में दिल्ली सरकार ने कहा कि दिल्ली में अब कोरोना के मामलों की संख्या कम हो गई है। दरअसल, 26 नवम्बर को हाई कोर्ट ने कोरोना के बढ़ते मामलों पर दिल्ली सरकार को फटकार लगाई थी। हाई कोर्ट ने पूछा था कि आप कैसे कह सकते हैं कि शादियों के लिए अतिथियों की संख्या को सीमित करने के आदेश का उल्लंघन नहीं हो रहा है। कोर्ट ने कहा था कि इस तरह शादियों की अनुमति नहीं दी जा सकती है। इसके लिए स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसिजर लागू करना होगा क्योंकि ये सुपर स्प्रेडर साबित हो सकते हैं। अभी शादियों का सीजन है। यह देखना होगा कि शादियों में पचास से ज्यादा लोग नहीं जुटें। 11 नवम्बर को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता राकेश मल्होत्रा ने कहा था कि उन्हें कोरोना का संक्रमण हुआ और उन्हें न तो बेड मिला और न ही कोई अस्पताल। एक दोस्त की मदद से उन्हें एक नर्सिंग होम में भर्ती किया गया जहां एक ऑक्सीमीटर के अलावा किसी ने कोई मदद नहीं की। याचिका में निजी और सरकारी अस्पतालों और लैब्स में कोरोना की पर्याप्त टेस्टिंग करने का दिशानिर्देश जारी करने की मांग की गई है। पहले की सुनवाई के दौरान राकेश मल्होत्रा ने कोर्ट से कहा था कि दिल्ली के निजी अस्पतालों को भी कोरोना अस्पताल घोषित किया गया है। इन अस्पतालों को भी लक्षणों वाले मरीजों के साथ-साथ बिना लक्षणों वाले मरीजों का भी टेस्ट करने का दिशानिर्देश जारी करने की मांग की गई है। हिन्दुस्थान समाचार/संजय/बच्चन-hindusthansamachar.in