दिल्ली दंगों को लेकर आरोप-पत्र में शामिल नामों पर आनंद शर्मा ने उठाया सवाल
दिल्ली दंगों को लेकर आरोप-पत्र में शामिल नामों पर आनंद शर्मा ने उठाया सवाल
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दिल्ली दंगों को लेकर आरोप-पत्र में शामिल नामों पर आनंद शर्मा ने उठाया सवाल

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नई दिल्ली, 13 सितम्बर (हि.स.)। राजधानी दिल्ली में इस वर्ष फरवरी माह में हुए दंगों के मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा दायर आरोप पत्र में माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव, अर्थशास्त्री जयती घोष, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राध्यापक एवं कार्यकर्ता अपूर्वानंद और डॉक्यूमेंट्री फिल्मकार राहुल रॉय का नाम सह-षड्यंत्रकर्ताओं के रूप में दर्ज होने पर बवाल मचा हुआ है। आरोप पत्र के सार्वजनिक होने के बाद से ही लगातार बयानबाजी हो रही है। इस क्रम में अब राज्यसभा सांसद एवं कांग्रेस नेता आनंद शर्मा भी शामिल हो गए हैं। आनंद शर्मा ने रविवार को ट्वीट कर कहा कि माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, प्रख्यात शिक्षाविद जयती घोष, अपूर्वानंद और योगेंद्र यादव को दिल्ली के दंगों से जोड़ना अधिकार और कानून का दुरुपयोग है। इसे किसी भी तरीके से सही नहीं ठहराया जा सकता। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस द्वारा अपने आरोप पत्र में ऐसे बड़े नाम शामिल करना बताता है कि उसकी जांच निष्पक्ष नही है। ऐसे में दिल्ली पुलिस की अखंडता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि विरोध करने के लिए नेताओं और नागरिकों की स्वतंत्रता एक गैर परक्राम्य लोकतांत्रिक अधिकार है। इसे झुठलाया या दबाया नहीं जा सकता। लेकिन दिल्ली पुलिस के कृत्य और सत्ता में बैठे लोगों ने अधिकारों का दुरुपयोग कर सत्य और न्याय की आवाजों का मज़ाक उड़ाया है। संसद का मॉनसून सत्र आरंभ होने से महज दो दिन पहले सार्वजनिक किए गए आरोप-पत्र में दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 581 लोग घायल हो गए थे, जिनमें से 97 गोली लगने से घायल हुए थे। आरोप पत्र में दावा है कि कालिता और नरवाल ने दंगों में न केवल अपनी संलिप्तता स्वीकार की है बल्कि जयती घोष, अपूर्वानंद और राहुल रॉय का नाम भी अपने संरक्षकों के तौर पर लिया है। जिन्होंने छात्राओं से कथित तौर पर कहा था कि वे संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन करें और ‘किसी भी हद तक जाएं’। आरोप-पत्र के मुताबिक छात्राओं-कार्यकर्ताओं ने पुलिस को यह भी बताया कि उन तीनों ने इस्लामी समूह पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और जामिया समन्वय समिति के साथ मिलकर पिंजरा तोड़ के सदस्यों को बताया कि सीएए के खिलाफ अभियान को किस तरह आगे ले जाना है। पुलिस ने घटनाक्रम की पुष्टि जामिया की छात्रा फातिमा के बयानों से की है। हिन्दुस्थान समाचार/आकाश/सुनीत-hindusthansamachar.in