दिल्ली दंगा : चार्जशीट को लेकर चिदंबरम ने पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल
दिल्ली दंगा : चार्जशीट को लेकर चिदंबरम ने पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल
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दिल्ली दंगा : चार्जशीट को लेकर चिदंबरम ने पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल

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बोले- पुलिस भूली सूचना और चार्जशीट के बीच जांच व पुष्टि जैसे महत्वपूर्ण कदम नई दिल्ली, 13 सितम्बर (हि.स.)। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) का विरोध करने के दौरान इसी वर्ष फरवरी में हुए दंगे को लेकर दिल्ली पुलिस के दायर आरोप पत्र पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने आरोप पत्र में सीताराम येचुरी एवं अन्य वरिष्ठ लोगों का नाम शामिल होने पर इसे भद्दा मजाक बताया है। उन्होंने कहा कि यह कैसी जांच है, जहां एक आरोपित के कह देने भर से किसी अन्य को भी आरोपित बना दिया जाता है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि क्या पुलिस भूल गई कि किसी सूचना को चार्जशीट में दर्ज करने से पहले उसकी जांच और पुष्टि की जानी आवश्यक है। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने रविवार को ट्वीट कर कहा कि दिल्ली पुलिस ने दिल्ली दंगों के मामले में एक पूरक आरोप पत्र में सीताराम येचुरी और कई अन्य विद्वानों और कार्यकर्ताओं का नाम लेते हुए आपराधिक न्याय प्रणाली का भद्दा मजाक उड़ाया है। एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा कि कानून इतना मूर्ख नहीं हो सकता है, यदि किसी आरोपित (गुलफिशा फातिमा) ने अपने बयान में एक नाम का उल्लेख किया है, तो उस व्यक्ति को चार्जशीट में आरोपित बनाया जाएगा। क्या दिल्ली पुलिस यह भूल गई है कि सूचना और चार्जशीट के बीच जांच और पुष्टि नामक महत्वपूर्ण कदम हैं? कांग्रेस नेता ने एक पुलिस अधिकारी जूलियो रिबेरो द्वारा दिल्ली दंगों के मामले में दिल्ली पुलिस के पक्षपातपूर्ण व्यवहार के लिए उसकी भर्त्सना की है। जिस पर चिदंबरम ने खुशी जताई और पूछा कि क्या दिल्ली पुलिस इस प्रतिष्ठित पुलिस अधिकारी की बात सुनेगी? उधर, आरोप पत्र में नाम शामिल होने पर योगेन्द्र यादव ने कहा है, ‘मेरे बारे में की गई टिप्पणी में मेरे भाषण का एक भी वाक्य नहीं है। मुझे हैरानी है कि दिल्ली पुलिस ने मेरे भाषणों की रिकॉर्डिंग देखने की जहमत भी नहीं उठाई।’ सीताराम येचुरी ने कहा, ‘दिल्ली पुलिस केंद्र और गृह मंत्रालय के अधीन है। यह अवैध और गैरकानूनी कार्रवाई भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की राजनीति का सीधा नतीजा है।' इससे पहले कांग्रेस सांसद आंनद शर्मा ने भी दिल्ली पुलिस के आरोप पत्र पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, प्रख्यात शिक्षाविद जयती घोष, अपूर्वानंद और योगेंद्र यादव को दिल्ली के दंगों से जोड़ना अधिकार और कानून का दुरुपयोग है। इससे दिल्ली पुलिस की जांच की अखंडता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। विरोध करने के लिए नेताओं और नागरिकों की स्वतंत्रता एक गैर परक्राम्य लोकतांत्रिक अधिकार है। सत्य और न्याय की आवाज़ों का मज़ाक नहीं उड़ाया जा सकता। हिन्दुस्थान समाचार/आकाश-hindusthansamachar.in