दर्द से गर्भवती तड़प रही थी, पीपीई किट पहन मोबाइल टॉर्च की रोशनी में कराई डिलीवरी
दर्द से गर्भवती तड़प रही थी, पीपीई किट पहन मोबाइल टॉर्च की रोशनी में कराई डिलीवरी
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दर्द से गर्भवती तड़प रही थी, पीपीई किट पहन मोबाइल टॉर्च की रोशनी में कराई डिलीवरी

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कोरोना से जंग लड़ रहे दो स्वास्थ्य योद्धाओं ने मानवता की एक नई मिसाल पेश की है। उन्होंने जोखिम भरा काम कर 2 जिंदगियों को बचाया। दरअसल पूरा मामला बुधवार देर रात करीब सवा 2 बजे बरवाला के गांव खेदड़ का है। यहां प्रसव पीड़ा से कराह रही कोराेना को हराकर होम आइसोलेट गर्भवती के लिए एंबुलेंस में तैनात इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन सुखपाल और चालक रोहताश फरिश्ता बनकर पहुंचे। दोनों ने विषम परिस्थितियों के बीच बिना वक्त गंवाए मकान में ही गर्भवती की सुरक्षित डिलीवरी करवा दी। इस दौरान बिजली भी नहीं थी। ऐसे में मोबाइल टॉर्च की रोशनी में जोखिम उठाकर जच्चा-बच्चा की जिंदगी बचाई। इसके बाद दोनों को सिविल अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करवा दिया। परिस्थितियां विषम थी मगर + नहीं डगमगया : सुखपाल इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन सुखपाल ने बताया कि बुधवार देर रात करीब 2.10 बजे की बात है। कोविड ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट इंचार्ज डॉ. समीर कंबोज के निर्देश मिले कि होम आइसोलेट गर्भवती को लाकर सिविल अस्पताल में भर्ती करवाना है। तुरंत चालक रोहताश के साथ एंबुलेंस लेकर खेदड़ पहुंच गए। रास्ता खराब था तो मेन रोड पर ही एंबुलेंस खड़ी कर करीब दो किमी पैदल चलकर पहुंचे। वहां लाइट नहीं थी। गर्भवती की प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। कंडीशन देख लगा कि सिविल अस्पताल पहुंचने से पहले डिलीवरी हो जाएगी। जान का खतरा हो सकता है। तभी डिसीजन लिया कि डिलीवरी तो मकान में करवानी होगी। पीपीई किट पहनकर मोबाइल टॉर्च की रोशन में डिलीवरी करवाई। इसमें करीब पौना घंटा लगा। एडवांस लाइफ सपोर्ट में जीवन रक्षक संबंधित प्राइमरी उपकरण मौजूद रहते हैं, जिनका प्रयोग किया था। डिलीवरी हुई और बच्ची को जन्म दिया। उसकी नाल काटकर साफ कपड़े में लपेटा। मौके पर इंफेक्शन से बचाव के लिए सफाई की। दोनों को फिर एंबुलेंस में बैठाकर सिविल अस्पताल पहुंचाया। संक्रमण से बचाव के लिए परिवार का कोई और सदस्य सहयोग नहीं कर सकता था। योद्धाओं ने दो जिंदगियों को बचाया है : डॉ. समीर डॉ. समीर कंबोज ने कहा कि गर्भवती पहले रोहतक पीजीआई में दाखिल थी। उन्हें कोरोना को हराकर होम आइसोलेट कर दिया था। इसकी जानकारी मिली तो डॉक्टर्स से बातचीत करके सिविल अस्पताल में आइसोलेट करवाने के लिए एंबुलेंस भिजवाई थी। वहां एंबुलेंस लेकर पहुंचे सुखपाल और चालक रोहताश से जानकारी मिली कि गर्भवती की हालत गंभीर है। तब दोनों ने बिना वक्त गंवाए डिलीवरी करवाई, जिसमें सुखपाल ने अहम भूमिका निभाई। स्वस्थ डिलीवरी के दौरान लड़की पैदा हुई। एक तरह से रेस्क्यू ऑपरेशन था, जिसमें सफल रहे। अब प्रसूता-नवजात आइसोलेट हैं। एंबुलेंस टीम ने वाकई 2 जिंदगियों को बचाकर मानवीय एवं सराहनीय काम किया है। एंबुलेंस मेल स्टाफ का अनुभव आया काम : डॉ.जितेंद्र यह मामला संज्ञान में आया है। एंबुलेंस मेल स्टाफ ने ढाणी में विषम परिस्थितियों के बीच सुरक्षित डिलीवरी करवा दी। दो जिंदगियों को अपने अनुभव से बचाया है। स्टाफ ने प्रशंसनीय काम किया है। अगर हमने कुछ सीखा हुआ है और इमरजेंसी में वह ज्ञान या अनुभव काम आता है तो उसे इस्तेमाल करना चाहिए। – डॉ. जितेंद्र शर्मा, डिप्टी सिविल सर्जन एवं एंबुलेंस ट्रांसपोर्ट इंचार्ज।-newsindialive.in