दंगों-से-अपाहिज-हुई-जिंदगी-किसी-ने-गंवाई-आंखें-तो-किसी-को-गंवाने-पड़े-हाथ
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दंगों से अपाहिज हुई जिंदगी , किसी ने गंवाई आंखें तो किसी को गंवाने पड़े हाथ

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(अहमद नोमान) नयी दिल्ली, 23 फरवरी (भाषा) उत्तर पूर्वी दिल्ली के शिव विहार में रहने वाले मोहम्मद वकील की उनके घर के नीचे ही परचून की दुकान थी। इस दुकान से रोजाना होने वाली लगभग 200 से 300 रुपये की आमदनी से उनके सात सदस्यीय परिवार का गुजारा आराम से क्लिक »-www.ibc24.in

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