डीएसजीएमसी चुनाव : दिल्ली सरकार और गुरुद्वारा चुनाव निदेशालय को नोटिस
डीएसजीएमसी चुनाव : दिल्ली सरकार और गुरुद्वारा चुनाव निदेशालय को नोटिस
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डीएसजीएमसी चुनाव : दिल्ली सरकार और गुरुद्वारा चुनाव निदेशालय को नोटिस

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नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (हि.स.)। दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) का चुनाव पिछली मतदाता सूची के साथ कराने की अनुमति देने के सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली सरकार और गुरुद्वारा चुनाव निदेशालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस डीएन पटेल की अध्यक्षता वाली बेंच ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई के बाद नोटिस जारी किया। सिंगल बेंच के फैसले को शिरोमणि अकाली दल ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। पिछले 12 अक्टूबर को जस्टिस जयंत नाथ की सिंगल बेंच ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को मार्च 2021 के चुनाव पिछली मतदाता सूची के साथ ही कराने की इजाजत दे दी था। सिंगल बेंच ने दिल्ली सरकार से कहा था कि इस चुनाव के संपन्न होते ही दिल्ली सरकार यह तय करेगी कि अगले चुनाव से पहले नई मतदाता सूची बनकर तैयार हो जाए। सिंगल बेंच ने कहा था कि चुनाव के खत्म होते ही दिल्ली सरकार अगले चुनाव से पहले नई मतदाता सूची तैयार कर लेगी। कोर्ट ने कहा था कि चुनाव 29 मार्च, 2021 तक दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमेटी का गठन होना चाहिए। ऐसी स्थिति में 15 मार्च तक चुनाव संपन्न हो जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा था कि अगर नई मतदाता सूची बनाई जाएगी तो करीब चार से पांच लाख सिख मतदाताओं से संपर्क करना होगा। इसके लिए दस महीने का समय चाहिए। ऐसे में 30 मार्च, 2021 तक चुनाव संपन्न होना संभव नहीं दिखता । सिंगल बेंच ने कहा कि 2017 में हुए चुनाव के बाद नई मतदाता सूची बनाने का काम हो जाना चाहिए था। सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने कहा था कि वो नई मतदाता सूची बनाने के कोर्ट के पहले के निर्देश का पालन करेगी लेकिन उसके लिए उसे समय चाहिए। इसके लिए वर्तमान दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का कार्यकाल बढ़ाना पड़ेगा। कोर्ट ने पाया कि नई मतदाता सूची बनाने का काम पूरी गति से चल रहा होता अगर कोरोना का संकट न आया होता। कोरोना की वजह से नई मतदाता सूची बनाने की पूरी प्रक्रिया में देरी हो रही है। पहले ये तय किया गया था कि 31 जनवरी, 2021 तक नई मतदाता सूची बनाने का काम पूरा कर लिया जाए। नई मतदाता सूची के लिए 46 वार्डों में 460 अधीनस्थ कर्मचारियों की नियुक्ति की जरूरत होगी, लेकिन अधिकांश कर्मचारी कोरोना ड्यूटी में तैनात किए गए हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि दिल्ली में करीब 4 से 5 लाख मतदाता हैं, जिनके घर-घर जाकर संपर्क करना काफी खतरनाक है। हिन्दुस्थान समाचार/ संजय-hindusthansamachar.in