टेली मार्केटर्स के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने पर ट्राई को फटकार
टेली मार्केटर्स के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने पर ट्राई को फटकार
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टेली मार्केटर्स के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने पर ट्राई को फटकार

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नई दिल्ली, 22 सितम्बर (हि.स.)। दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी (ट्राई) को इस बात के लिए फटकार लगाई कि वो रजिस्ट्रेशन नहीं कराने वाले उन टेली मार्केटर्स के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा जो अवैध व्यापारिक संचार में लिप्त रहते हैं। पेमेंट प्लेटफार्म पेटीएम की याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस डीएन पटेल ने ट्राई से कहा कि आप कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई कीजिए, तब बाकी लोग कानून का पालन करेंगे। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ट्राई के वकील की विभिन्न रेगुलेशन की व्याख्या को लेकर आपत्ति जताते हुए कहा कि आप बिना रजिस्ट्रेशन वाले टेलीमार्केटर्स पर कार्रवाई की बजाय रेगुलेशन की व्याख्या कर रहे हैं। दरअसल ट्राई के वकील कोर्ट को बताना चाहते थे कि उन्होंने कानून का पालन नहीं करनेवाले विभिन्न लोगों और संस्थाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि कारण बताओ नोटिस कार्रवाई नहीं है। हमें वैसा एक्शन दिखाइए जिसमें आपने दस लोगों के खिलाफ कार्रवाई किया हो। आपके दिमाग में ये गलत व्याख्या है कि कारण बताओ नोटिस कोई कार्रवाई है। हम सुनवाई की हर तिथि को आपके खिलाफ जुर्माना लगा देंगे। कोर्ट ने पिछले 15 जुलाई को ट्राई को निर्देश दिया था कि वो टेलीमार्केटर्स के रजिस्ट्रेशन का स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे। सुनवाई के दौरान पेटीएम ने कहा था कि ट्राई को गैर पंजीकृत टेलीमार्केटर्स के खिलाफ कार्रवाई करने का पर्याप्त अधिकार है। पेटीएम की ओर से वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने गैरजरूरी फोन कॉल्स और फिशिंग को रोकने के लिए टेलीकॉम कमर्शियल कम्युनिकेशंस कस्टमर्स प्रिफ्रेंस रेगुलेशंस (टीसीसीसीपीआर) की धारा 3 को लागू करने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि कुछ नौ लाख टेलीमार्केटर्स का रजिस्ट्रेशन होना है जिसमें से बीस हजार टेलीमार्केटर्स पहले ही रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। अब तक करीब 80 हजार टेलीमार्केटर्स अपना रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। पेटीएम ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि उसके ग्राहकों को फिशिंग के जरिये फंसाकर धोखाधड़ी किया जा रहा है और केंद्र सरकार और ट्राई इस फिशिंग गतिविधि को नहीं रोक रही है। पिछले 2 जून को पेटीएम की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और ट्राई को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने संचार मंत्रालय, ट्राई, सभी मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों को जवाब देने का निर्देश दिया था। पेटीएम की ओर से वकील करुणा नंदी ने कहा था कि उसके लाखों ग्राहकों के साथ फिशिंग गतिविधि के जरिये धोखाधड़ी की गई है। फिशिंग गतिविधि को मोबाइल प्रदाता कंपनियां रोक नहीं रही हैं। इससे उसे आर्थिक नुकसान के अलावा उसकी छवि को भी नुकसान हुआ है। पेटीएम ने इस नुकसान की भरपाई के लिए सौ करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है। फिशिंग गतिविधि एक साइबर क्राईम है। इसमें किसी व्यक्ति से ई-मेल , फोन या टेक्स्ट मैसेज से संपर्क किया जाता है। मैसेज भेजनेवाला व्यक्ति अपने को किसी संगठन का प्रतिनिधि बताता है और इस तरह वो संबंधित व्यक्ति के निजी डाटा को चुरा लेता है। वह लोगों के बैंकिंग और क्रेडिट कार्ड का विवरण और पासवर्ड लेकर उन्हें चूना लगा देता है। एक नोटिफिकेशन के जरिये टीसीसीसीपीआर को मंजूरी दी थी। उसमें अनचाही व्यावसायिक सूचनाओं पर रोक लगाने की बात की गई है। याचिका में कहा गया है कि ट्राई के नोटिफिकेशन में टेलीकॉम कंपनियों को ऐसे टेलीमार्केटर्स की पहचान कर उन पर रोक लगाने की जिम्मेदारी है। उनका बिना रजिस्ट्रेशन के काम करने देने की वजह से ही पेटीएम के ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी हुआ है। हिन्दुस्थान समाचार/संजय/सुनीत-hindusthansamachar.in