टू-जी स्पेक्ट्रम केस: सीबीआई और ईडी की याचिका पर शुक्रवार को भी सुनवाई
टू-जी स्पेक्ट्रम केस: सीबीआई और ईडी की याचिका पर शुक्रवार को भी सुनवाई
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टू-जी स्पेक्ट्रम केस: सीबीआई और ईडी की याचिका पर शुक्रवार को भी सुनवाई

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नई दिल्ली, 15 अक्टूबर (हि.स.)। दिल्ली हाईकोर्ट टू-जी स्पेक्ट्रम केस में पूर्व केंद्रीय मंत्री ए राजा और दूसरे आरोपियों को ट्रायल कोर्ट से बरी करने के फैसले के खिलाफ सीबीआई और ईडी की याचिका पर कल यानि 16 अक्टूबर भी सुनवाई जारी रखेगा। गुरुवार को आरोपियों की ओर से कहा गया कि जब कोई कानूनी मसला ऊपरी अदालत में लंबित हो तो सुनवाई टाल देना चाहिए। आरोपियों की ओर से वकील विजय अग्रवाल ने कहा कि भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13(1(डी) को हटाने पर ऊपरी अदालत विचार कर रही है। उन्होंने कुछ केसों का हवाला दिया जिसमें सुप्रीम कोर्ट में मामले लंबित होने पर कोर्ट ने सुनवाई टाल दी है। उन्होंने कहा कि ईडी ने खुद ऐसी दलील हाईकोर्ट में दे चुकी है, वो यहां कैसे बदल सकते हैं। या तो कोर्ट को सुनवाई टाल देना चाहिए या उसे केस ट्रांसफर कर देना चाहिए। अग्रवाल ने जनरल क्लॉज एक्ट की धारा 6ए का उल्लेख किया। उन्होंने राज्यसभा में हुई बहस और सेलेक्ट कमेटी की रिपोर्ट का जिक्र किया। उन्होंने जस्टिस मुरलीधर की ओर से दिए एक फैसले का हवाला दिया जिसमें आर्थिक लाभ का कोई जिक्र नहीं है। अगर एक सब-इंस्पेक्टर किसी सचिव से पूछे कि आपने ये कैसे किया तो ये जनहित नहीं है। अगर बाबुओं को ऐसे अभियोजित किया जाएगा तो कोई अधिकारी काम नहीं करेगा। इस मामले में हर अपराध एक काल्पनिक अपराध है। पिछले 14 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान एएसजी आत्माराम नाडकर्णी ने कहा था कि भ्रष्टाचार निरोधक कानून में संशोधन का मामला हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में लंबित है इसलिए इस मसले को डिवीजन बेंच को रेफर किया जाना चाहिए। पिछले 12 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कहा था कि उसने अपील दायर करने की सभी कानूनी शर्तों को पूरा किया है जबकि आरोपियों ने कहा था कि अपील दायर करने के लिए कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से एएसजी संजय जैन ने कहा था कि अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 378 के तहत सीबीआई के स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्युटर को अपील दायर करने की जो अनुमति मिली वो एक प्रशासनिक कार्य था और उसमें कोर्ट की सीधे कोई भूमिका नहीं है। एक आरोपी की ओर से वरिष्ठ वकील एन हरिहरन ने लॉ कमीशन की रिपोर्ट पढते हुए कहा था कि अगर पब्लिक प्रोसिक्युटर की नियुक्ति अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 24(8) का उल्लंघन कर की गई है तो वह संविधान की धारा 14 का भी उल्लंघन होगा। पिछले 9 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान एक आरोपी आसिफ बलवा की ओर से वकील विजय अग्रवाल ने कहा था कि सीबीआई ने ई-मेल के जरिये दस्तावेज भेजे गए हैं। सीबीआई हाईकोर्ट के रुल्स के मुताबिक दस्तावेज उपलब्ध कराए। ई-मेल की विश्वसनीयता संदेह में है। मैं किसी भी उस दस्तावेज को नहीं देखूंगा जो हलफनामे में नहीं हो। इस मामले में सीबीआई और ईडी ने ए राजा औऱ कनिमोझी समेत सभी 19 आरोपियों को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। 25 मई 2018 को कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री ए राजा और कनिमोझी समेत सभी आरोपियों को नोटिस जारी किया था । हाईकोर्ट ने इसी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की अपील पर सुनवाई करते हुए सभी आरोपियों को नोटिस जारी किया है । बता दें कि पटियाला हाउस कोर्ट ने 21 दिसंबर 2017 को फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। जज ओपी सैनी ने कहा था कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा है कि दो पक्षों के बीच पैसे का लेन देन हुआ है। हिन्दुस्थान समाचार/ संजय-hindusthansamachar.in