टू-जी स्पेक्ट्रम केस में 19 अक्टूबर को भी होगी सुनवाई
टू-जी स्पेक्ट्रम केस में 19 अक्टूबर को भी होगी सुनवाई
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टू-जी स्पेक्ट्रम केस में 19 अक्टूबर को भी होगी सुनवाई

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नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (हि.स.)। दिल्ली हाईकोर्ट टू-जी स्पेक्ट्रम केस में पूर्व केंद्रीय मंत्री ए राजा और दूसरे आरोपियों को ट्रायल कोर्ट से बरी करने के फैसले के खिलाफ सीबीआई और ईडी की याचिका पर 19 अक्टूबर को भी सुनवाई जारी रखेगा। आज ईडी की ओर से कहा गया कि भ्रष्टाचार निरोधक कानून में संशोधन कर भ्रष्टाचार की नीयत से किए गए कार्य में भी सजा का प्रावधान है। वहीं आरोपियों की ओर से कहा गया कि महज कर्तव्य में लापरवाही को भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत अपराध नहीं कहा जा सकता है। सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से वकील डीपी सिंह ने कहा कि भ्रष्टाचार निरोधक कानून में संशोधन के बाद स्थिति बदल गई है और कोर्ट को सावधान रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर संशोधन को आरोपियों पर लागू नहीं किया जाएगा तो ये न्याय नहीं कहा जा सकता है। भ्रष्टाचार निरोधक कानून में संशोधन को टू-जी के केस में भी लागू करना होगा। अगर कानून वैध है तो उसे लागू करना चाहिए। कोर्ट को विधायी बहस में नहीं जाना चाहिए। विधायिका ने लंबे समय के विचार के बाद भ्रष्टाचार निरोधक कानून से धारा 13(10)(डी) को हटा दिया। आरोपियों की ओर से वकील सिद्धार्थ लूथरा ने जयललिता पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पढ़ते हुए कहा कि महज कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही का मतलब अपराध नहीं है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार निरोधक कानून में संशोधन के बाद ये सवाल उठता है कि क्या ये अपील कायम रह पाएगा। संशोधन के बाद धारा 13(1)(डी) और धारा 13(1)(सी) को हटा दिया गया। अगर ये संशोधन पूर्व प्रभावी हैं तो इस अपील को खारिज किया जाना चाहिए। सिद्धार्थ लूथरा की दलील के बाद कोर्ट ने सभी पक्षकारों को अपनी दलीलों और फैसलों का संक्षिप्त विवरण कोर्ट में दाखिल करने का निर्देश दिया। पिछले 15 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से कहा गया था कि जब कोई कानूनी मसला ऊपरी अदालत में लंबित हो तो सुनवाई टाल देना चाहिए। आरोपियों की ओर से वकील विजय अग्रवाल ने कहा था कि भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13(1(डी) को हटाने पर ऊपरी अदालत विचार कर रही है। उन्होंने कुछ केसों का हवाला दिया जिसमें सुप्रीम कोर्ट में मामले लंबित होने पर कोर्ट ने सुनवाई टाल दिया है। उन्होंने कहा था कि ईडी ने खुद ऐसी दलील हाईकोर्ट में दे चुकी है, वो यहां कैसे बदल सकते हैं। या तो कोर्ट को सुनवाई टाल देना चाहिए या उसे केस ट्रांसफर कर देना चाहिए। अग्रवाल ने जनरल क्लॉज एक्ट की धारा 6ए का उल्लेख किया। उन्होंने राज्यसभा में हुई बहस और सेलेक्ट कमेटी की रिपोर्ट का जिक्र किया। उन्होंने जस्टिस मुरलीधर की ओर से दिए एक फैसले का हवाला दिया जिसमें आर्थिक लाभ का कोई जिक्र नहीं है। अगर एक सब-इंस्पेक्टर किसी सचिव से पूछे कि आपने ये कैसे किया तो ये जनहित नहीं है। अगर बाबुओं को ऐसे अभियोजित किया जाएगा तो कोई अधिकारी काम नहीं करेगा। इस मामले में हर अपराध एक काल्पनिक अपराध है। इस मामले में सीबीआई और ईडी ने ए राजा औऱ कनिमोझी समेत सभी 19 आरोपियों को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। 25 मई 2018 को कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री ए राजा और कनिमोझी समेत सभी आरोपियों को नोटिस जारी किया था। हाईकोर्ट ने इसी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की अपील पर सुनवाई करते हुए सभी आरोपियों को नोटिस जारी किया है। बता दें कि पटियाला हाउस कोर्ट ने 21 दिसंबर 2017 को फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। जज ओपी सैनी ने कहा था कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा है कि दो पक्षों के बीच पैसे का लेन देन हुआ है। हिन्दुस्थान समाचार/संजय/सुनीत-hindusthansamachar.in