जीएसटी मुआवजे के लिए केंद्र सरकार के उधार लेने के फैसले का चिदंबरम ने किया स्वागत
जीएसटी मुआवजे के लिए केंद्र सरकार के उधार लेने के फैसले का चिदंबरम ने किया स्वागत
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जीएसटी मुआवजे के लिए केंद्र सरकार के उधार लेने के फैसले का चिदंबरम ने किया स्वागत

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नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (हि.स.)। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में कमी की भरपाई को लेकर केंद्र सरकार ने 1.10 लाख करोड़ रुपये उधार लेना की योजना बनाई है। इसके लिए वह राज्यों को उनका भुगतान करेगी। हालांकि वित्तमंत्रालय की तरफ से यह भी कहा गया है कि यह राशि राज्यों को लोन के तौर पर मिलेगी। राज्यों की आर्थिक मदद को लेकर केंद्र के इस फैसले का पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि अब सरकार को गतिरोध खत्म करने वाला कदम उठाकर आगे बढ़ना चाहिए ताकि केंद्र और राज्यों के बीच फिर से विश्वास बहाली हो सके। पी. चिदंबरम ने कहा कि शुक्रवार को ट्वीट कर कहा कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यों को लिखा है कि केंद्र सरकार 1,10,208 करोड़ रुपये उधार लेगी और राज्य सरकारों को बैक-टू-बैक ऋण देगी। सरकार के हृदय परिवर्तन के बाद का यह फैसला स्वागत योग्य है। हालांकि जीएसटी मुआवजे में अंतर के संतुलन पर कोई स्पष्टता नहीं है। वित्तमंत्री के पत्र में इस बात पर कोई स्पष्टता नहीं है कि कौन पैसा उधार लेगा और कर्ज कैसे चुकाया जाएगा। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि कई राज्य अपने स्वयं के खाते पर उधार लेने के विरोध में हैं, जो बिल्कुल सही है। उन्होंने कहा कि पहली राशि और दूसरी राशि में कोई अंतर नहीं है। केंद्र को 1,06,830 करोड़ रुपये की समान शर्तों की पेशकश करके तुरंत गतिरोध का समाधान करना चाहिए क्योंकि उसने 1,10,208 करोड़ रुपये की पेशकश की है। चिदंबरम ने कहा है कि जीएसटी मुआवजे के भुगतान को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच की तनातनी को समाप्त करने की दिशा में सरकार की ओर से पहला सही कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि ‘अब मैं प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री से दूसरा कदम उठाने और केंद्र और राज्यों के बीच विश्वास को फिर से स्थापित करने का आग्रह करता हूं।’ उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को कहा था कि केंद्र सरकार राज्यों की जीएसटी में कमी को पूरा करने के लिए 1.1 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेगी। उपयुक्त किश्तों में कर्ज के तौर यह राशि लिए जाने से भारत सरकार के राजकोषीय घाटा पर कोई असर नहीं होगा। इसके बाद राशि को राज्यों को जीएसटी कंपंजेशन सेस रिलीज के बदले में एक के बाद एक लोन के तौर पर दिया जाएगा। हिन्दुस्थान समाचार/आकाश/सुनीत-hindusthansamachar.in