जानवर है सज़ा के लिए (व्यंग्य)

जानवर है सज़ा के लिए (व्यंग्य)
जानवर-है-सज़ा-के-लिए-(व्यंग्य)

इंसान, इंसान को सज़ा देने के लिए नए नए आरोप गढ़ता है। अच्छे से अच्छा, महंगा वकील करता है। बहुत कोशिश करता है कि उसे सजा न मिल पाए। ज्योतिषी से मिलता है। सालों साल मुक्कदमा चलता है बस फैसला नहीं होता। आमतौर पर इधर वाला वकील कोशिश करता है क्लिक »-www.prabhasakshi.com

अन्य खबरें

No stories found.