जहरीली शराब से मौत और व्यवस्था को चुनौती
जहरीली शराब से मौत और व्यवस्था को चुनौती
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जहरीली शराब से मौत और व्यवस्था को चुनौती

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सियाराम पांडेय 'शांत' लखनऊ, फिरोजाबाद, हापुड़, मथुरा,आगरा, बागपत और मेरठ में जहरीली शराब के तांडव के बाद प्रयागराज जिले के फूलपुर थाना क्षेत्र के चार गांवों के छह लोग जहरीली शराब के सेवन से असमय काल कवलित हो गए। इस घटना के बाद हरकत में आए प्रशासन ने एक ही संचालक के तीन शराब ठेकों को सील कर दिया और एक शराब विक्रेता को हिरासत में ले लिया। फूलपुर थाना क्षेत्र में नवंबर माह की शुरुआत में ही एक व्यक्ति की मौत जहरीली शराब पीने की वजह से हुई थी। अगर प्रयागराग जिला और पुलिस प्रशासन उसी वक्त गंभीर हुआ होता तो एक साथ छह लोगों की मौत का मातम न मनाना पड़ता। जहरीली शराब से मौत का यह सिलसिला पहला और अंतिम नहीं है। देश और प्रदेश में जहरीली शराब से लोगों के मरने और गंभीर रूप से अस्पतालों में भर्ती होने की खबरें अखबारों में छपती रहती है। टीवी चैनलों की सुर्खियां बनती रहती है। सरकारें मृतकों के परिजनों को 2 लाख और गंभीर रूप से बीमार हुए शराब पीड़ितों को 50 हजार का मुआवजा देकर कर्तव्य की इतिश्री मान लेती है। वह दावा तो खूब करती है कि जहरीली शराब के कारोबारियों को बख्शा नहीं जाएगा। कुछ दिन उसकी सक्रियता दिखती भी है और फिर सबकुछ सामान्य हो जाता है। नशे के कारोबारी अपने लाभ के लिए मौत का खेल खेलते रहते हैं। प्रयागराज की घटना के तुरंत बाद उत्तर प्रदेश के लगभग सभी जिलों में शराब कारोबारियों पर शिकंजा कसा जाने लगा है। शराब दुकान के लाइसेंसियों को गिरफ्तार किया जाने लगा है। सवाल यह उठता है कि इससे पूर्व जिला और पुलिस प्रशासन क्या करता है जो उसे किसी बड़ी हृदयविदारक घटना के बाद ही जहरीली और मिलावटी शराब के कारोबारियों पर अंकुश लगाने की सुध आती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नकली शराब बेचने वालों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए हैं। उनके इस निर्णय का स्वागत किया जाना चाहिए लेकिन शराब से होने वाली जनहानि पर उनके आक्रोश का जायजा इस बात से भी लिया जाना चाहिए कि इसी मुद्दे पर उन्होंने लखनऊ के पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडेय को आधी रात हटा दिया था। उनकी जगह रातों-रात ध्रुवकांत ठाकुर ने कार्यभार संभाला। उनके कार्यभार संभाले दो दिन भी नहीं बीते हैं कि प्रयागराज जिले के फूलपुर थाना क्षेत्र में यह बड़ी घटना हो गई। लखनऊ और फिरोजाबाद के आबकारी अधिकारियों को हटाने के साथ ही पिछले दिनों लखनऊ पुलिस कमिश्नर पर भी गाज गिरी थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज की घटना के बाद सख्त तेवर अख्तियार कर लिए हैं। उन्होंने निर्देश दिया है कि जहरीली शराब बेचने वालों पर प्रशासन गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाए। दोषी पाए जाने पर उनकी संपत्ति जब्त की जाए और बाद में उसे नीलाम कर पीड़ितों को मुआवजा दिया जाए। जुलाई, 2019 में यूपी कैबिनेट में आबकारी नीति 2019-20 में संशोधन का प्रस्ताव पास हुआ था जिसमें न केवल प्रदेश के शराब माफियाओं के खिलाफ कड़े कदम उठाने की इच्छा जाहिर की गई थी बल्कि आबकारी नीति में भी बड़े बदलाव किए गए थे। ओवररेटिंग की शिकायत मिलने पर जुर्माने में साढ़े सात गुना बढ़ोतरी की गई थी। पहली शिकायत पर 75 हजार रुपये, दूसरी बार डेढ़ लाख रुपये और तीसरी शिकायत पर लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई करने का सख्त प्रावधान किया गया था। जहरीली शराब के मामलों को देखते हुए शराब में मिलावट पाए जाने पर पहली बार में ही रिटेल और हॉलसेल की दुकानों के लाइसेंस निरस्त करने का प्रावधान तो इसमें था ही, मिलावट के आरोपियों पर गैंगेस्टर और एनएसए के तहत कार्रवाई करने का भी प्रावधान किया गया था। जहरीली शराब से मौत होने पर मिलावटी शराब बनाने वाले माफियाओं पर आईपीसी की धारा 304 के तहत गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने का भी सख्त प्रावधान इस नए संशोधन में किया था लेकिन केवल कानून बनाने से ही किसी समस्या का समाधान नहीं हो जाता। यह सब इस बात परनिर्भर करता है कि कानून का क्रियान्वयन करने वालों की नीयत कैसी रही है। उन्होंने ईमानदारी से अपने दायित्व का निर्वहन किया भी या नहीं। अगर अधिकारियों ने वर्ष 2019 में हुए आबकारी नियम संशोधन कानून पर ही अमल किया होता तो बार-बार प्रदेश में शराब से जनहानि की नौबत न आती और मुख्यमंत्री को एक ही निर्देश अनेक बार न देने पड़ते। शराब के चलते लोग अनेक घातक बीमारियों के शिकार होते हैं। इनके इलाज पर सरकार को शराब बिक्री से होने वाली आय से कहीं अधिक खर्च करना पड़ता है। ऐसे में सरकार को सोचना होगा कि शराबबंदी से जितना नुकसान आंका जा रहा है, उतना है नहीं। देशवासी स्वस्थ रहें तो इससे बड़ा लाभ दूसरा कुछ नहीं हो सकता। सरकार के सलाहकारों को भी सोचना होगा कि वह उसे समझाएं कि शराब बिक्री के तात्कालिक लाभ तो हो सकते हैं लेकिन इसके दूरगामी दुष्परिणाम उससे भी अधिक हैं। न केवल बीमारियों के रूप में वरन अपराध के रूप में भी। इसलिए अब भी समय है जब यह समझ लिया जाए कि नशे का उत्पादन, विपणन और सेवन किसी भी रूप में देश के लिए लाभकारी नहीं है। (लेखक हिन्दुस्थान समाचार से संबद्ध हैं।)-hindusthansamachar.in