जयशंकर ने चीन और रूस के विदेश मंत्रियों के साथ त्रिपक्षीय वार्ता की
जयशंकर ने चीन और रूस के विदेश मंत्रियों के साथ त्रिपक्षीय वार्ता की
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जयशंकर ने चीन और रूस के विदेश मंत्रियों के साथ त्रिपक्षीय वार्ता की

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नई दिल्ली, 10 सितम्बर (हि.स.)। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पूर्वी लद्दाख में सैन्य तनाव की स्थिति के बीच गुरवार को चीन के विदेश मंत्री वांग यी और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ ‘रूस-भारत-चीन (रिक) वार्ता प्रक्रिया’ के तहत गुरुवार को महत्वपूर्ण बैठक की। इन नेताओं के बीच कोरोना महमारी फैसले के बाद से यह पहली सीधी मुलाकात थी। भारत-चीन सीमा विवाद के बावजूद रिक वार्ता प्रक्रिया जारी रहने को एक महत्वपूर्ण राजनयिक उपलब्धी माना जा रहा है। यह बैठक शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक से अलग मॉस्को में हुई। विदेश मंत्री ने इस त्रिपक्षीय वार्ता से जुड़ी तस्वीर साझा करते हुए ट्वीट करते हुए मेजबान रूस की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत अब रिक वार्ता प्रक्रिया की अध्यक्षता ग्रहण कर रहा है। इससे जाहिर है कि रिक वार्ता प्रक्रिया की अगली बैठक भारत में आयोजित होगी। इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शंघाई सहयोग संगठन के विदेश मंत्रियों की बैठक में गुरुवार को भाग लिया जिसमें पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और चीन के विदेश मंत्री वांग यी शामिल थे। भारत के एससीओ के पूर्ण सदस्य बनने के बाद संगठन के विदेश मंत्रियों की यह तीसरी बैठक थी। बैठक में विदेशमंत्रियों ने अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर विचार करने के साथ ही कोरोना वायरस महामारी से निपटने के उपायों पर भी चर्चा की। मेजबान देश रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बैठक में हुए विचार विमर्श के बारे में मीडियो को बताया कि विदेशमंत्रियों ने कोरोना महामारी के मद्देजनर आपसी सहयोग और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी ने दुनिया में राजनीतिक और आर्थिक रूप से उथल-पुथल पैदा की है। सभी देशों और अंतरारष्ट्रीय संस्थाओं के लिए यह परीक्षा की घड़ी है। इसका मुकाबला करने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को मजबूत बनाए जाने की जरूरत है। लावरोव ने शंघाई सहयोग संगठन की प्रासंगिकता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संगठन उभर रही चुनौतियों और खतरों का मुकाबला करने के लिए एक कारगर संस्था है। अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सामना करने के लिए एससीओ की प्रासंगिकता और बढ़ गई है। कोरोना महामारी के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभावों से उभरने के लिए विभिन्न देशों के बीच सहयोग और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को सशक्त बनाना समय की मांग है। विदेश मंत्री ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ द्विपक्षीय बैठक करने के पहले सुबह उज्बेकिस्तान के अपने समकक्ष अब्दुल अजीज कामिलोव और कजाखस्तान के अपने समकक्ष मुख्तार तिलेउबर्दी के साथ अलग-अलग बैठकें कीं और क्षेत्रीय चिंताओं एवं सुरक्षा के मामलों पर मध्य एशियाई देशों के साथ सहयोग पर सहमति जताई। जयशंकर ने ट्वीट किया कि उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री के साथ सौहार्दपूर्ण बैठक से दिन की शुरुआत की। क्षेत्रीय चिंताओं से निपटने के लिए करीबी समन्वय स्थापित करने पर सहमति बनी। दोनों देश बढ़ती विकास साझेदारी को आगे लेकर जाएंगे। वे मध्य एशिया मामलों में उज्बेकिस्तान की अहम भूमिका की सराहना करता हैं। एक अन्य ट्वीट में जयशंकर ने कहा कि एससीओ शिखर सम्मेलन से पहले कजाखस्तान के अपने समकक्ष से मुलाकात करके खुशी हुई। हमने व्यापार और ऊर्जा क्षेत्र में विचारों का आदान-प्रदान किया। दोनों देश मिलकर काम करते हुए क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा पर सहयोग करना जारी रखेंगे।’’ विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि एससीओ के विदेश मंत्रियों की बैठक के इतर विदेश मंत्री जयशंकर ने इसके सदस्यों के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। श्रीवास्तव ने कहा कि इस एससीओ के विदेश मंत्रियों की बैठक में निकट भविष्य में एससीओ शिखर सम्मेलन और आगामी शिखर सम्मेलन की तैयारियों के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया। इस बैठक के बाद रिक देशों के विदेश मंत्री दोपहर के भोजन पर मिले। जयशंकर ने मास्को पहुंचने के बाद बुधवार को रूस के विदेश मंत्री लावरोव से मुलाकात की थी। बैठक के दौरान दोनों देशों ने अपने विशिष्ट रणनीतिक संबंधों की समीक्षा करने के साथ ही इन्हें और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की। भारत और रूस के बीच रणनीतिक संबंध की स्थापना की यह बीसवीं वर्षगांठ है। रूस वह पहला देश था जिसके साथ भारत ने रणनीतिक संबंध स्थापित किए थे। इससे पहले बुधवार को ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ताजिकिस्तान और किर्गिज़स्तान के अपने समकक्ष सिरोजिद्दीन मुहरिद्दीन और चिंगिज़ एदारबेकोव से मुलाकात की। हिन्दुस्थान समाचार/अनूप/सुफल/सुनीत-hindusthansamachar.in