चित्रकूट धाम से अयोध्या पहुंची कादमगिरि शिला रामलला को समर्पित
चित्रकूट धाम से अयोध्या पहुंची कादमगिरि शिला रामलला को समर्पित
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चित्रकूट धाम से अयोध्या पहुंची कादमगिरि शिला रामलला को समर्पित

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- श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा उतारी गयी आरती अयोध्या, 09 दिसम्बर (हि.स.)। चित्रकूट धाम से अयोध्या पहुंची कामदगिरि शिला यात्रा का कारसेवकपुरम में बुधवार को भव्य स्वागत किया गया। जहां श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के द्वारा आरती उतारी गई। जिसके बाद शिला को लेकर राम जन्मभूमि परिसर पहुुंचें और श्री रामलला के दरबार मे समर्पित किया गया। राम मंदिर निर्माण के लिए देश के विभिन्न तीर्थ स्थलों की मिट्टी समर्पित किया गया था, वही चित्रकूट के कामदगिरि धाम से भी मंदिर निर्माण में शिला लगाई जा सके, इसके लिए कामदगिरि तीर्थ स्थल से बड़ी संख्या में संत महंत के साथ श्रद्धालु शिला लेकर अयोध्या पहुंचे है। जहां विश्व हिंदू परिषद के मुख्यालय कार्यक्रम में इस यात्रा का स्वागत किया गया। वहीं श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट के सदस्य और निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास ने इस शीला को स्वीकार करते हुए सिरा लेकर पहुंचे संत के माध्यम से श्री रामलला के दरबार में शिला को समर्पित कराया गया। कामदगिरि जिला यात्रा लेकर अयोध्या पहुंचे महंत मदन गोपाल दास ने बताया कि कामदगिरि भगवान की शिला लेकर चित्रकूट से अयोध्या आए हैं। बताया कि राम मंदिर निर्माण के लिए 5 अगस्त को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शिला पूजन किया गया था। उसी समय चित्रकूट के कामदगिरि मंदिर में भी अभिजीत मुहूर्त में शिला पूजन हुआ था आज उस शिला को भगवान श्री रामलला के दरबार में समर्पित किया हूं। वही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कामदगिरि से आई शीला को लेकर बताया कि भगवान श्रीराम छोटी आयु में अपनी माता की आज्ञा का पालन करते हुए चित्रकूट गए और 11 वर्ष चित्रकूट के पर्वतों में निवास किया और चित्रकूट के आसपास के जंगलों में घूमें संत महात्मा ऋषि मुनियों के आश्रम में गए। चित्रकूट भगवान राम और हिंदू समाज के जीवन में उतना ही महत्व है जितना अयोध्या और चित्रकूट के संतों के मन में विचार आया कि जिन पर्वतों पर त्रेतायुग में भगवान राम ने निवास किया है उन पर्वतों की एक शिला स्मृति के स्वरूप यहां लाई जाए। यह हिन्दुस्थान में राम के प्रति समाज की अनंत श्रद्धाओं की यह प्रतीक है। हिन्दुस्थान समाचार/पवन/राजेश-hindusthansamachar.in