गृह मंत्री का झूठ, प्रदेश में संवैधानिक संकट के हालात, सीएम इस संकट के सीधे ज़िम्मेदार : भाजपा
गृह मंत्री का झूठ, प्रदेश में संवैधानिक संकट के हालात, सीएम इस संकट के सीधे ज़िम्मेदार : भाजपा
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गृह मंत्री का झूठ, प्रदेश में संवैधानिक संकट के हालात, सीएम इस संकट के सीधे ज़िम्मेदार : भाजपा

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-राज्यपाल की बैठक में जाने से मना करने वाले गृह मंत्री का सीएम हाउस में समीक्षा बैठक में शरीक़ होना अशिष्ट आचरण, संवैधानिक अवमानना रायपुर ,14 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने पूछा है कि प्रदेश की राज्यपाल अनुसुइया उईके की बुलाई गई समीक्षा बैठक में एकांतवास (क्वारेंटाइन)के बहाने शिरक़त नहीं करने वाले गृह मंत्री आख़िर मुख्यमंत्री बुलाई गई समीक्षा बैठक में आज कैसे शरीक़ हो गए? गृह मंत्री का यह रवैया सीधे-सीधे राज्यपाल का अपमान और संवैधानिक मर्यादा का उल्लंघन है। साय ने कहा कि प्रदेश की सर्वोच्च संवैधानिक प्रमुख होने के नाते प्रदेश में क़ानून-व्यवस्था के बिगड़ते हालात पर राज्यपाल की चिंता को संजीदगी से लेने के बजाय गृह मंत्री ने राजनीतिक अशिष्टता का परिचय दिया है। गृह मंत्री ने क्वारेंटाइन होने की बात कहकर राज्यपाल द्वारा आहूत बैठक में जाने से मना कर दिया, जिसके कारण यह अति महत्वपूर्ण बैठक राज्यपाल को स्थगित करनी पड़ी। लेकिन वही गृह मंत्री उसी दिन मुख्यमंत्री बघेल द्वारा आहूत समीक्षा बैठक में एकांतवास होने के बावज़ूद शरीक़ हो जाते हैं। यह संवैधानिक अवमानना है। साय ने कहा कि गृह मंत्री का झूठ पकड़ में आने के बाद प्रदेश में संवैधानिक संकट के हालात उत्पन्न हो गये हैं। सीएम इस संकट के सीधे ज़िम्मेदार हैं। मंत्री या सीएम की ज़िम्मेदारी तय हो। साय ने बुधवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा गृह विभाग के कार्यों की गई समीक्षा के मद्देनज़र कहा है कि प्रदेश में लगातार बढ़ रहे अपराधों पर अंकुश लगाने और नाबालिग बच्चियों, युवतियों व महिलाओं तथा आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए और ज़्यादा प्रभावी व सख़्त क़दम उठाए जाने ज़रूरी हैं। कहा कि सिर्फ़ समीक्षा करने और निर्देश देकर सरकार अपने दायित्व की इतिश्री न मानें, बल्कि सरकार के निर्देशों का यथोचित रीति से पालन हो, यह भी देखा जाना चाहिए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि अब प्रदेश सरकार को अपने पुलिस तंत्र को ज़्यादा ज़वाबदेह बनाकर दुरुस्त करना होगा। प्रदेश का कोई हिस्सा आज ऐसा नहीं रह गया है, जो अपराधों से अछूता रह गया हो। चोरी, लूट, आपसी विवाद के साथ-साथ अब प्रदेश में अपहरण, बलात्कार, हत्याएँ, जानलेवा हमलों का जैसा सिलसिला चल पड़ा है, उससे शांत और सुरक्षित समझा जाने वाला छत्तीसगढ़ अब दहशत के साए में साँसें लेने विवश नज़र आ रहा है। कहा कि प्रदेश में जबसे कांग्रेस सत्ता में आई है, राजनीतिक सत्ता के संरक्षण में अपराधी सरेराह-सरेआम बेख़ौफ़ अपराध करके अपना आतंक क़ायम करने पर आमादा हैं। राजधानी और उससे लगे ज़िलों में जब यह आलम है तो प्रदेश के बाकी हिस्सों का अनुमान लगाया जा सकता है। पिछले नौ माह में ही, विशेषकर लॉकडाउन की अवधि के दैरान महिलाओं के साथ सर्वाधिक हिंसक व दुष्कर्म की घटनाएँ घटी हैं। हिन्दुस्थान समाचार /केशव/रामानुज-hindusthansamachar.in