खेती को बंधक बनाने वाले अध्यादेश वापस ले सरकार : कांग्रेस
खेती को बंधक बनाने वाले अध्यादेश वापस ले सरकार : कांग्रेस
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खेती को बंधक बनाने वाले अध्यादेश वापस ले सरकार : कांग्रेस

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- पार्टी काले कानून के खिलाफ संसद के अंदर और बाहर लड़ेगी जंग नई दिल्ली, 12 सितम्बर (हि.स.)। अर्थव्यवस्था और बेरोजगारी के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने वाली कांग्रेस को अब एक नया मौका मिल गया है। इस बार कांग्रेस ने मोदी सरकार पर खेती हड़पने का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि सरकार पहले ही जमीन हड़पने का अध्यादेश लाई थी, अब वह खेती को बंधक बनाने के लिए तीन कानून लेकर आई है। भाजपा सरकार खेत-खलिहान को पूंजीपतियों के हाथ गिरवी रखने का षड्यंत्र रच रही है। कांग्रेस की मांग है कि इस किसान विरोधी अध्यादेशों को सरकार जल्द वापस ले। जब तक ऐसा नहीं होता कांग्रेस इसके खिलाफ संसद के अंदर और बाहर निर्णायक जंग लड़ेगी। कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने शनिवार को पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने खेत-खलिहान-अनाज मंडियों को लेकर लाए तीन अध्यादेशों के जरिए किसान-मजदूर और आढ़ती पर क्रूर हमला किया है। उन्होंने इन अध्यादेशों को खेती-किसानी के लिए काला कानून बताया। उन्होंने कहा कि यह सरकार पूंजीपति मित्रों के जरिए 'ईस्ट इंडिया कंपनी' बना रही है। किसानों को 'लागत प्लस 50 प्रतिशत मुनाफा' का सपना दिखाकर सत्ता में आई मोदी सरकार आज किसानों के लिए ही काल बन गई है। सुरजेवाला ने कहा कि सरकार के लाए तीनों अध्यादेशों से पड़ने वाले असर को इस प्रकार समझें कि अनाज मंडी को खत्म करने की 'कृषि उपज खरीद व्यवस्था' पूरी तरह नष्ट हो जाएगी। अगर ऐसा होता है तो किसान-मजदूर बर्बाद हो जाएंगे, हालांकि पूंजीपतियों को जरूर फायदा होगा। वहीं किसानों की फसल मंडी में सामूहिक खरीद के बजाय कंपनियां सीधे उनके खेत से खरीदेंगी तो मूल्य निर्धारण, वजन और कीमत की सामूहिक मोलभाव की शक्ति खत्म हो जाएगी। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि मंडियां खत्म होते ही वहां काम करने वाले लाखों-करोड़ों मजदूर-आढ़ती, मुनीम, ट्रांसपोर्टर आदि की आजीविका का क्या होगा? इतना ही नहीं मंडी व्यवस्था के खात्मे से प्रांतों की आय भी खत्म हो जाएगी। वहीं मंडी व्यवस्था खत्म होने से मोदी सरकार का वो दावा भी झूठा साबित होता है, जिसमें कहा गया था कि किसान अपनी फसलों को कहीं भी बेच सकता है। कांग्रेस महासचिव ने कहा कि यह नए अध्यादेश किसानों को 'ठेका प्रथा' में फंसाकर अपनी ही जमीन पर मजदूर बना देगा। उन्होंने कहा कि कृषि विशेषज्ञों के अनुसार अध्यादेश की आड़ में सरकार असल में 'शांता कुमार कमेटी' की रिपोर्ट लागू करना चाहती है, ताकि एफसीआई के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद ही न करनी पड़े। उन्होंने कहा कि इन अध्यादेशों में न तो खेत मजदूरों के अधिकारों के संरक्षण का कोई प्रावधान है और न ही जमीन जाेतने वाले बंटाइदारों के अधिकारों के संरक्षण का। ये अध्यादेश सीधे तौर पर 'संघीय ढांचे' पर हमला है। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार के जिन तीन अध्यादेशों के खिलाफ कांग्रेस पार्टी हमलावर है, उनमें पहले कानून के मुताबिक अब व्यापारी के मंडी से ही किसान की फसल खरीदने की बाध्यता समाप्त हो गई। अब व्यापारी को मंडी के बाहर से फसल खरीदने की छूट मिलेगी। दूसरे कानून के तहत अनाज, दालों, खाद्य तेल, प्याज, आलू आदि को जरूरी वस्तु अधिनियम से बाहर करके इसकी स्टॉक सीमा समाप्त कर दी गई है। जबकि तीसरे कानून में सरकार कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग को बढ़ावा देने की बात कह रही है। हिन्दुस्थान समाचार/आकाश/बच्चन-hindusthansamachar.in