कोरोना को भी जीने का अधिकार है! (व्यंग्य)

कोरोना को भी जीने का अधिकार है! (व्यंग्य)
कोरोना-को-भी-जीने-का-अधिकार-है!-(व्यंग्य)

भाइयों खाली क्यों बैठे हो? चलो उठो। अभी असंख्य मंदिर बनाने बाकी हैं। मस्जिद कम पड़ते जा रहे हैं। चलो उठो कहीं अल्लाह नाराज़ न हो जाए। गिरजाघर का घंटा नाद कानों तक नहीं पहुँच रहा। चलो जल्दी करो अजान के लिए मस्जिद और घंटानाद के लिए गिरजाघर तरसते जा क्लिक »-www.prabhasakshi.com