कोरोना के चलते जेएनयू में पहली बार 18 नवम्बर को 'वर्चुअल' दीक्षांत समारोह
कोरोना के चलते जेएनयू में पहली बार 18 नवम्बर को 'वर्चुअल' दीक्षांत समारोह
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कोरोना के चलते जेएनयू में पहली बार 18 नवम्बर को 'वर्चुअल' दीक्षांत समारोह

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- राष्ट्रपति कोविंद मुख्य अतिथि, केंद्रीय शिक्षा मंत्री निशंक होंगे सम्मानित अतिथि - 600 से अधिक छात्रों को प्रदान की जाएंगी पीएचडी की उपाधि - जेएनयू का यह लगातार तीसरा दीक्षांत समारोह होगा नई दिल्ली, 16 नवम्बर (हि.स.)। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के इतिहास में पहली बार 18 नवम्बर को वर्चुअल माध्यम से कन्वोकेशन (दीक्षांत समारोह) आयोजित होगा। समारोह में बतौर मुख्य अतिथि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और सम्मानित अतिथि के रूप में केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक शामिल होंगे। जेएनयू के रेक्टर प्रोफेसर सतीश चंद्र गरकोटी ने सोमवार को दीक्षांत समारोह के बारे में जानकारी दी कि जेएनयू का यह चौथा वार्षिक दीक्षांत समारोह होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोरोना महामारी के बढ़े हुए मामले को देखते हुए यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह के दौरान 600 से अधिक पीएचडी की उपाधि प्रदान की जाएगी। यह उपाधि उन शोधार्थियों को दी जाएगी, जिन्होंने 11 स्कूलों और 3 अन्य केंद्रों में शोध किया था। जेएनयू कुलपति प्रोफेसर एम. जगदीश कुमार ने कहा कि चार दशकों से अधिक समय के अंतराल के बाद, जेएनयू ने 2018 में दूसरा और 2019 में तीसरा दीक्षांत समारोह आयोजित किया था। उन्होंने कहा कि अब हम सौहार्दपूर्वक आपको चौथे दीक्षांत समारोह (ऑनलाइन) में आमंत्रित करते हैं। उल्लेखनीय है कि जेएनयू में पहला दीक्षांत समारोह 1972 में आयोजित किया गया था जिसमें बलराज साहनी मुख्य अतिथि थे। दूसरा दीक्षांत समारोह 46 साल बाद 2018 में आयोजित किया गया। जिसमें विवि के चांसलर विजय कुमार सारस्वत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। 2019 में तीसरे दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कहा कि हमें खुशी है कि कोरोना महामारी के बावजूद हम दीक्षांत समारोह की परंपरा को जारी रख रहे हैं। ताकि हमारे विद्यार्थी को अपने पीएचडी की डिग्री प्राप्त करने के जीवन भर के अनुभव को एक बार उन्हें संजोने का अवसर मिल सके। यह उनके माता-पिता के लिए भी गर्व का क्षण है कि वे अपने बच्चे की कड़ी मेहनत, अस्मिता और शोध के जुनून को देख सकें। कुलपति ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान जेएनयू में नए स्कूलों और केंद्रों की स्थापना की गई हैं। जिसमें मुख्य रूप से स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग, अटल बिहारी वाजपेयी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप, विशेष केंद्र आपदा अध्ययन और राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन के लिए विशेष केंद्र आदि शामिल है। आने वाले वर्षों में इन केंद्रों से अनुसंधान कर पीएचडी करने वालों की संख्या में भी वृद्धि होगी। हिन्दुस्थान समाचार/सुशील-hindusthansamachar.in