केजरीवाल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र, डीयू एक्ट में संशोधन की मांग
केजरीवाल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र, डीयू एक्ट में संशोधन की मांग
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केजरीवाल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र, डीयू एक्ट में संशोधन की मांग

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नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी एक्ट में संशोधन की जरूरत पर जोर देते हुए कहा है कि प्रदेश में और अधिक शैक्षणिक संस्थान खोले जाने चाहिए। इसके लिए केजरीवाल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर डीयू एक्ट में संशोधन करने की मांग की है। केजरीवाल ने शुक्रवार को पत्रकार वार्ता में बताया कि अंग्रेजों के जमाने के कानून को बदला जाए ताकि नए कॉलेज, यूनिवर्सिटी दिल्ली में खोले जा सकें। उन्होंने कॉलेज, यूनिवर्सिटी की कमी को हाई कटऑफ का सबसे बड़ा कारण माना है, जिस वजह से कम नंबर वाले बच्चे एडमिशन से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि हम यह सब खोलने के लिए तैयार हैं। इन्वेस्टमेंट के लिए तैयार हैं। मगर हमारे सामने सबसे बड़ी कानूनी अड़चन है। डीयू के अंतर्गत 91 और आईपी के अंतर्गत 100 से अधिक शिक्षण संस्थान आते हैं। दिल्ली राज्य के 9 विश्वविद्यालय हैं। इसके अलावा जेएनयू है। केजरीवाल ने कहा कि लगातार छात्रों की संख्या बढ़ रही है ऐसे में हमें दिल्ली में कई और कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों की आवश्यकता है। हर साल दिल्ली में 2.50 लाख बच्चे 12वीं पास करते हैं, लेकिन एडमिशन मात्र 1.25 लाख बच्चों को ही मिल पाता है। ऐसी स्थिति में तमाम बच्चे एडमिशन से वंचित रह जाते हैं। दिल्ली के मौजूदा कॉलेजों में पास होने वालों में से सिर्फ 50 फीसदी बच्चों के लिए ही जगह है। उन्होंने कहा कि डीयू एक्ट 1922 में अंग्रेजों ने बनाया था जिसके तहत डीयू बना। डीयू एक्ट में लिखा है, अगर कोई नया कॉलेज दिल्ली में खुलेगा तो वह सिर्फ दिल्ली विश्वविद्यालय से ही मान्यता ले सकता है। इसी कारण बीते 30 वर्षों से एक भी नया कॉलेज नहीं खोला गया है। डीयू एक्ट सेक्शन 5 (2) के तहत कोई नया कॉलेज खुलेगा तो वह डीयू के अंदर ही आएगा। कोई नया विश्वविद्यालय और कॉलेज नहीं खुल सकता है। 1998 में जरा सा संशोधन करके कहा गया था कि दिल्ली विश्वविद्यालय के साथ आईपीयू के साथ एफिलिएशन हो सकता है। वहां सिर्फ प्रोफेशनल कोर्स होते हैं, ग्रेजुएशन नहीं होता है, इसलिए जरूरी है कि अंग्रेजों के इस कानून को बदला जाए, जिससे उच्च शिक्षा सभी तक पहुंचाया जा सके। हिन्दुस्थान समाचार /प्रतीक खरे-hindusthansamachar.in