किसानों की लागत कम करने, उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दे रही सरकार- योगी आदित्यनाथ
किसानों की लागत कम करने, उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दे रही सरकार- योगी आदित्यनाथ
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किसानों की लागत कम करने, उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दे रही सरकार- योगी आदित्यनाथ

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-मुख्यमंत्री ने किसान दिवस पर पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को दी श्रद्धांजलि -किसानों को ट्रैक्टर-चाबी वितरण के साथ किया सम्मानित लखनऊ, 23 दिसम्बर (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को किसान दिवस पर पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण की जयंती के मौके पर विधानभवन प्रांगण में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर अपनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कृषक उपहार योजना के अन्तर्गत किसानों को ट्रैक्टर वितरण, केसीसी एप का लोकार्पण, दुर्घटना बीमा लाभ वितरण और अन्नदाताओं को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने किसान सम्मान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि सरकार किसानों के हित में प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। किसानों की लागत को कम करने और उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रगलिशील किसानों ने देश के अंदर खाद्यान्न की आात्मनिर्भरता को न केवल बनाए रखने बल्कि इस क्षेत्र में अपने स्वयं के प्रयासों के साथ शासन की योजनाओं को जोड़ते हुए प्रदेश के करोड़ों किसानों के जीवन में खुशहाली लाने की दिशा में एक प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और हमारी यह प्रतिबद्धता हर एक अवसर पर बहुत स्पष्ट दिखाई देती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश आबादी के लिहाज से देश का सबसे बड़ा राज्य है। देश की आबादी के लगभग साढ़े सोलह प्रतिशत लोग यहां रहते हैं। लेकिन, प्रदेश के हमारे किसानों की मेहनत, परिश्रम और पुरुषार्थ से देश के अंदर खाद्यान्न उपलब्ध कराने में उत्तर प्रदेश का 21 से 22 प्रतिशत योगदान है। उन्होंने कहा कि यह बिना परिश्रम और पुरुषार्थ के संभव नहीं है। इसमें सबसे अधिक भूमिका हमारे उन किसानों की होती है, जो नई तकनीक का उपयोग करते हुए खेती की लागत को कम करते हुए उत्पादकता को बढ़ाने में बड़ी भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा वह स्वयं देखते हैं कि एक हेक्टेयर खेती में 100 कुंतल से अधिक धान उत्पन्न करना, 95 से 100 कुंतल के बीच में गेहूं का उत्पादन करना, प्रति हेक्टेयर 800 से 1000 कुंतल गन्ने का उत्पादन करना अपने आप में लोगों के लिए आश्चर्य का विषय होता है। लेकिन, हमारे उत्तर प्रदेश के प्रगतिशील किसानों ने प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों के साथ बेहतरीन समन्वय के माध्यम से यह सब करके दिखाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसीलिए प्रदेश सरकार ने कृषि विभाग, मंडी समिति और अन्य संस्थानों की ओर से किसानों के हितों के लिए अनेक प्रकार के कार्यक्रम प्रारंभ किये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा आज प्रदेश के कुछ किसानों को ट्रैक्टर उपलब्ध कराएं गए। कभी ट्रैक्टर एक कल्पना होती थी। राज्य सरकार आज किसानों के हाथ में ट्रैक्टर की चाबी देकर उसे तकनीक के साथ जोड़ने का आह्वान करते हुए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आज तो कृषि के क्षेत्र में बहुत परिवर्तन हो रहा है। उन्होंने कहा कि 2017 में जब प्रदेश में हमारी सरकार बनी तो भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश को 20 कृषि विज्ञान केंद्र देने की पहल की। इससे पहले इन्हें नहीं लिया गया। वहीं आज हमारे वहां सभी 20 विज्ञान केंद्र धरातल पर हैं और ये किसानों को तकनीक का ज्ञान उपलब्ध कराने में एक निर्णायक भूमिका के साथ कार्य करते हुए दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कृषि विज्ञान केंद्रों को कृषि विश्वविद्यालय के साथ जोड़ना और कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से दुनिया के अंदर के अन्य उन देशों में जहां कहीं खेती किसानी के लिए कुछ भी नया अनुसंधान हुआ है,शोध हुआ है, उसको हम उत्तर प्रदेश की धरती पर उतारने का कार्य करेंगे। इस संकल्प के साथ हमारे कृषि विज्ञान केंद्र का कार्य कर रहे हैं। हमारे पास पहले से ही चार कृषि विश्वविद्यालय हैं। अभी हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने झांसी में केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय का उद्घाटन किया। इससे पहले से प्रदेश के अंदर बीएचयू का कृषि संकाय बेहतरीन तरीके से अपना योगदान दे रहा है। प्रदेश के अंदर आज 89 कृषि विज्ञान केंद्र अपने क्षेत्र में नई परिकल्पना, नई तकनीक के साथ किसानों की आमदनी को कई गुना बढ़ाने के संकल्प के साथ कार्य करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसीलिए केंद्र की सरकार पहले दिन से ही इस बात को लेकर के काम कर रही है, जैसा चौधरी चरण सिंह कहा करते थे कि देश की प्रगति का रास्ता खेत और खलिहानों से होकर गुजरता है। यानि भारत की प्रगति तब होगी जब इस देश का किसान प्रगतिशील होगा। भारत के अंदर समृद्धि तब आएगी जब किसान समृद्ध होगा। भारत की कृषि प्रधान व्यवस्था ही देश की अर्थव्यवस्था का आधार है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक आत्मनिर्भरता का आधार हमारा स्थानीय उत्पाद बनेगा। इसमें कृषि से जुड़ी चीजें भी शामिल हैं। सूक्ष्म लघु एवं मध्यम मध्यम के उत्पाद भी इससे जुड़े हैं। यह सब हमारे गांवों, कस्बों में बसता है। औद्योगिकीकरण का यह आधार बनता है। व्यापक रोजगार की संभावनाओं को आगे बढ़ाता है। इसीलिए प्रधानमंत्री मोदी ने किसान को तकनीक के साथ जोड़ने के लिए ही मृदा परीक्षण के कार्यक्रम को प्रारंभ किया। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को आगे बढ़ाया। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना को हर खेत तक पानी पहुंचाने के कार्य को युद्ध स्तर पर आगे बढ़ाया। किसानों के जीवन में खुशहाली कैसे लाई जाए, लागत का डेढ़ गुना दाम किसान को मिल सके, न्यूनतम समर्थन मूल्य आदि प्रधानमंत्री मोदी की सोच का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यही नहीं आवश्यकता पड़ी कि किसान के जीवन में और भी परिवर्तन करने हैं उसे किसी भी प्रकार के बिचौलियों, साहूकारों से मुक्ति मिल सके तो इसके लिए भी प्रधानमंत्री मोदी ने पहल करते हुए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के जरिए मदद करने में कोई संकोच नहीं किया। उन्होंने कहा कि किसान सम्मान निधि योजना में किसानों को साल में 6000 हजार रुपये की धनराशि देने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि इसमें 18,000 करोड़ रुपये हर चौथे महीने में प्रधानमंत्री द्वारा किसानों के बैंक खातें में सीधे भेजे जा रहे हैं, जिससे वह अपनी आवश्यकताओं को पूरा कर सकें। इस तरह एक वर्ष में 54,000 करोड़ों रुपये की धनराशि अन्नदाताओं को खाते में सीधे देने की व्यवस्था की गई है। इससे किसान समय पर खाद, बीज, कृषि रसायन खरीद कर खेती के लिए अपनी जरूरत को पूरा करता है। हिन्दुस्थान समाचार/संजय/राजेश-hindusthansamachar.in