काव्य रूप में पढ़ें श्रीरामचरितमानस: भाग-30

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काव्य-रूप-में-पढ़ें-श्रीरामचरितमानस-भाग-30

सीताजी व्याकुल हुईं, सुनकर यह आवाज बोली मेरे रामजी, संकट में हैं आज। संकट में हैं आज, लखन तुम जल्दी जाओ जैसे भी हो प्राणनाथ के प्राण बचाओ। कह ‘प्रशांत’ लक्ष्मण बोला हे सीता माई चिंतित ना हों आप, सुरक्षित हैं रघुराई।।41।। - जिनके भ्रुकुटि विलास से, संचालित है सृष्टि क्लिक »-www.prabhasakshi.com

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