कानपुर देहात : आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़े इस किसान के कदम, फूलों की खेती से कमा रहा हाजरों
कानपुर देहात : आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़े इस किसान के कदम, फूलों की खेती से कमा रहा हाजरों
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कानपुर देहात : आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़े इस किसान के कदम, फूलों की खेती से कमा रहा हाजरों

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कानपुर देहात, 23 दिसम्बर (हि.स.)। देश के हर नागरिक का पेट भरने वाला अन्नदाता भी आज सरकार के आत्म निर्भर भारत के सपने को साकार करता नजर आ रहा है। देश का जागरूक किसान आज गेहूं, धान के अलावा भी अन्य खेती करके अपनी जीविका को बेहतर ढंग से चला रहा है। ऐसा ही कुछ कानपुर देहात का एक किसान परिवार भी कर रहा है जो बीते चार वर्षों से फूलों की खेती करके प्रतिदिन हाजरों रुपये का मुनाफा कमा रहा है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत देश को आत्म निर्भर होने का सपना देखा है जिसके चलते सरकार ने इस दिशा में कई योजनाएं भी चलाई हैं। सरकार का सपना है कि देश का हर नागरिक अपने पैरों में खड़ा होकर अन्य लोगों को भी जीविका दे सके। जिसके चलते स्वरोजगार योजना पर ध्यान दिया जा रहा है। सरकार के इस सपने को देश का युवा ही नही बल्कि हमारे देश का अन्नदाता भी साकार कर रहा है। जनपद के झींझक कस्बे में रहने वाले रंजन कुशवाहा बीते चार वर्षों से फूलों की खेती कर रहे हैं। "हिन्दुस्थान समाचार" से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि उनके पास गांव मे तीन बीघे खेती है जिसमे वह पहले गेंहू और धान लगाकर अपना गुजारा करते थे। इस फसल में सिर्फ परिवार का पेट ही पल पाता था और अगर फसल बर्बाद हो गई तो जीवन गुजारना मुश्किल हो जाता था। जिसके बाद किसी ने उनको फूलों के खेती करने की सलाह दी। जिसके बाद उन्होंने ऐसे ही एक बिसुआ खेत मे गुलाब के पौधे लगा दिए। कुछ ही दिनों में पौधे चल गए और उसमें गुलाब होने लगे सीजन में गुलाब बेच कर उन्होंने अच्छा मुनाफा भी कमाया जिसके बाद उन्होंने फसल छोड़कर फूलों की खेती का मन बना लिया। गुलाब के फूलों के साथ उन्होंने गेंदा के भी पौधे लगाए जिसमे अच्छी पैदावार हो रही है। परिवार ने साथ देकर बढ़ाई हिम्मत जब किसी का परिवार उसके काम मे उसके साथ लग जाये तो उसका तररकी करना तय हो जाता है। इसी तरह रंजन के परिवार ने भी उसके इस काम मे साथ दिया और इस कार्य को तेजी से आंगे बढ़ाया। रंजन की पत्नी मीना उनका खेतों में बराबर हाथ बांटती है जिससे रंजन की मेहनत भी कम हो जाती है और हिम्मत बढ़ जाती है। फूलों से प्रतिमाह हो रही हाजरों कि आमदनी रंजन बताते हैं कि जैसे ही कोई पर्व या फिर शादियों का समय आता है तो फूलों की मांग बढ़ जाती है जिसके दाम तो बढ़ते ही हैं साथ ही उनका मुनाफा भी दोगुना हो जाता है। सीजन के समय वह लगभग 50 हजार रुपये प्रति माह तक कमा लेते हैं। इससे उनके परिवार का खर्च बेहतर चलता है और वह अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा भी दिला पा रहे हैं। तकनीक से खेती करे किसान तो न हो परेशान रंजन के मुताबिक अगर किसान खुद को जागरूक कर सरकार की योजनाएं और बदलते समय के साथ तकनीकी को अपने जीवन मे अपनाए तो वह खेतों में बेहतर उपज पैदा कर सकता है। किसान को मौसम की मार के साथ मंडी के हालात से भी गुजरना पड़ता है जिसके चलते कई किसान हार कर मौत को अपना लेते हैं। सरकार ने किसानों के हित के लिए भी कई योजनाएं बनाई हैं जिससे वह खुद को बेहतर कर सकते हैं बस किसान को जागरूक होने की जरूरत है। हिन्दुस्थान समाचार/अवनीश/मोहित-hindusthansamachar.in