एलएसी पर गोलीबारी के बाद भारत-चीन में बढ़ा तनाव
एलएसी पर गोलीबारी के बाद भारत-चीन में बढ़ा तनाव
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एलएसी पर गोलीबारी के बाद भारत-चीन में बढ़ा तनाव

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- चार दशक बाद भारत-चीन ने एक-दूसरे पर की गोलीबारी सुनीत निगम नई दिल्ली, 08 सितम्बर (हि.स.)। पिछले एक हफ्ते से पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन के बीच बढ़ा रहा तनाव सोमवार देर रात गोलीबारी में बदल गया। पैंगोंग झील के दक्षिण किनारे पर चीनी सैनिकों ने घुसपैठ की कोशिश की थी। भारतीय सैनिकों ने चेतावनी दी लेकिन रुकने के बजाय उन्होंने फायरिंग कर दी। इस पर भारतीय सैनिकों ने भी जवाबी फायरिंग की। चीनी सैनिकों की ओर से फिर घुसपैठ की कोशिश के चलते करीब चार दशक बाद पहली बार दोनों तरफ से फायरिंग की गई है। घटना के बाद हालात नियंत्रण में है। भारत की ओर से आधिकारिक तौर पर घटना को लेकर कोई बयान नहीं दिया गया है। उधमपुर के वायु सेना स्टेशन के एयर बेस से देर रात लड़ाकू विमानों ने उड़ान भरी और लद्दाख सीमा पर हवाई हलचल तेज हो गई है। भारतीय सेना के सूत्रों ने 'वार्निंग शॉट्स' फायर किए जाने की पुष्टि की है। सीमा पर तैनात सैनिक तब से हाई अलर्ट पर हैं, जब से उन्होंने काला टॉप और हेल्मेट टॉप को अपने नियंत्रण में लिया है और चीनी सैनिक इन दोनों चोटियों पर नियंत्रण हासिल करने के लिए आगे बढ़ रहे थे, जिन्हें रोकने के लिए पहले चेतावनी दी गई और न रुकने पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच गोलीबारी की घटना हुई है। हालांकि सूत्रों ने दावा किया कि स्थिति नियंत्रण में है। उधर, चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के वेस्टर्न थियेटर कमान के प्रवक्ता कर्नल झांग शुइली की ओर से देर रात दिए गए बयान में कहा गया कि भारतीय सैनिकों की ओर से कथित 'उकसावे' की कार्रवाई की गई जिससे चीनी सैनिकों की ओर से जवाबी कार्रवाई की गई। पीएलए प्रवक्ता ने यह भी कहा कि भारतीय सेना ने अवैध रूप से पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे के पास शेनपाओ पहाड़ में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास को पार किया। पैन्गोंग झील के दक्षिणी छोर की थाकुंग चोटी पर 29/30 अगस्त की रात चीनी घुसपैठ नाकाम किये जाने के बाद भारत और चीन के बीच तनाव ज्यादा बढ़ा। इसके बाद ब्रिगेड कमांडर स्तर पर बातचीत के जरिए मसले का हल निकालने की कोशिश की गई लेकिन लगातार 6 दिन तक की गई वार्ता नाकाम रही। इसी के बाद से लद्दाख में दोनों देशों की सेना के बीच टकराव बढ़ा। इस बार पैन्गोंग झील के दक्षिणी छोर का लगभग 70 किमी. क्षेत्र भारत और चीन के बीच नया हॉटस्पॉट बना है। यह नया मोर्चा थाकुंग चोटी से शुरू होकर झील के किनारे-किनारे रेनचिन ला तक है। भारत की सीमा में आने वाले इस पूरे इलाके में रणनीतिक महत्व की तमाम ऐसी पहाड़ियां हैं जिन पर भारतीय सेना ने दो दिन के भीतर कब्जा कर लिया। 1962 के युद्ध के बाद दोनों देश अब तक इन पर सैन्य तैनाती नहीं करते रहे हैं। भारत के इस आक्रमक एक्शन से चीन सकते में आ गया और इस क्षेत्र में सैनिकों, आर्टिलरी और टैंक तनात कर दिए। ब्लैक टॉप चोटी के पास दोनों सेनाएं आमने-सामने और फायरिंग रेंज में आ गईं। थाकुंग चोटी से लेकर झील के किनारे-किनारे रेनचिन ला तक ऊंचाई वाली जगहों पर भारतीय सैनिकों की तैनाती चीन को नागवार गुजरी और तभी से यहां तनावपूर्ण माहौल कम होने के बजाय बढ़ता ही रहा। पैन्गोंग झील के दक्षिणी छोर पर भारतीय सेना की कार्रवाई के बाद चीन को शर्मिंदा करने वाली अमेरिकी खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया कि चीन ने जानबूझकर भारत को उकसाने के लिए पैन्गोंग झील के इस इलाके में घुसपैठ की कोशिश की। चीन अब इसलिए बौखला गया है कि उसके कमांडर ने भारतीय सैनिकों से टकराने के बजाय पीछे हटने का फैसला क्यों किया? सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने 03 सितम्बर को लेह पहुंचकर सीमा के हालातों की जानकारी ली। सेना प्रमुख ने दक्षिण पैंगोंग में सेना की कार्रवाइयों का जायजा लेने के लिए चुशुल का दौरा किया। उन्होंने अन्य क्षेत्रों में हवाई और जमीनी सर्वेक्षण भी किया। उन्होंने दौरा करने के बाद सीमा के हालात को बहुत ही नाजुक और गंभीर बताया। उन्होंने चीन को सख्त सन्देश दिया कि हमारे जवानों का जोश बरकरार है और हर स्थिति का सामना करने को तैयार हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि तनावपूर्ण स्थिति खत्म करने के लिये हम बातचीत के जरिए ही मौजूदा हालातों से निपटेंगे। इसी इलाके में सेना ने थाकुंग चोटी से लेकर रेकिन ला तक लगभग 30 प्रमुख ऊंचाइयों पर कब्जा करके चीन के मुकाबले अच्छी रणनीतिक बढ़त बनाई है। पूर्वी लद्दाख की सीमा पर तनाव के बीच 05 सितम्बर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की चीन के रक्षा मंत्री वेई फेंगही के साथ रूस की राजधानी मॉस्को में बैठक हुई। दोनों रक्षामंत्रियों के बीच यह बैठक 2 घंटे 20 मिनट चली इस बैठक में पिछले कुछ महीनों में भारत-चीन सीमा क्षेत्र के पश्चिमी क्षेत्र में गलवान घाटी सहित वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ हुए घटनाक्रम पर भारत की स्थिति को स्पष्ट रूप से व्यक्त किया गया। इस बैठक में भी राजनाथ सिंह ने चीन को कड़े और स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पूर्वी लद्दाख में तनाव का एकमात्र कारण चीनी सैनिकों का आक्रमक रवैया है और ऐसा चलता रहा तो भारत अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। राजनाथ सिंह ने चीन को यह भी सलाह दी कि मौजूदा हालात में दोनों देशों के लिए बॉर्डर पर शांति और सहज माहौल की जरूरत है। हमें सभी स्तर पर बातचीत के दरवाजे खुले रखने चाहिए चाहे वो सैन्य वार्ता हो या फिर कूटनीतिक और संवाद व संपर्क से बातचीत को हल करना चाहिए। इस सबके बावजूद एलएसी के पास दोनों देशों के सैनिकों के बीच तनाव कम नहीं हुआ और 1975 के बाद सीमा पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच इस तरह से पहली बार फायरिंग की घटना हुई। हिन्दुस्थान समाचार-hindusthansamachar.in