उत्तराखंड: चंपावत के लोगों को मलाल, 23 साल में भी हाल बेहाल
उत्तराखंड: चंपावत के लोगों को मलाल, 23 साल में भी हाल बेहाल
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उत्तराखंड: चंपावत के लोगों को मलाल, 23 साल में भी हाल बेहाल

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-जिले की स्थापना के तेईस साल पूरे राजीव मुरारी चंपावत, 15 सितम्बर (हि.स.)। जिला चंपावत 23 साल का गबरू जवान हो गया। मंगलवार को वह 24वें साल में प्रवेश कर गया। चंपावत को जिला बने भले ही 23 साल पूरे हो गए हों, लेकिन उपलब्धि के नाम पर कुछ खास नहीं है। जिस उद्देश्य से जिले के लिए संघर्ष किया गया, वह आज भी पूरा नहीं हो सका है। पर्वतीय व तराई के भूभाग में फैले जनपद के तमाम क्षेत्र आज भी ऐसे हैं, जहां मूलभूल सुविधाओं का अकाल है। स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और पानी को लोग तरस रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी पूरी तरह से लोग पिछड़े हैं। यही यहां के लोगों की पलायन की मुख्य वजह भी है। विकास का पहिया बेहद धीमा है। किसी भी सरकार ने चंपावत पर कृपा नहीं की। जिले में पांच तहसीलों के साथ ही चार विकासखंड और 313 ग्राम पंचायतें हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि ऑल वेदर रोड बनने के बाद जिले में पर्यटन गतिविधियां बढ़ सकती हैं। अगर ऐसा होता है तो क्षेत्र के लोगों को जरूर इसका लाभ मिलेगा। वहीं लोहाघाट में बन रहा कोलीढेक क्षेत्र भी पर्यटन को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध हो सकता है। लोहाघाट के लोगों की पानी की समस्या भी दूर होगी। चंपावत जिला मुख्यालय के लोगों की पेयजल समस्या को लेकर क्वैराला घाटी परियोजना पर नजर टिकी हुई है। देखना होगा कि 2020 में चंपावत के लोगों को क्वैराला का पानी मिल पाता है कि नहीं। चंपावत विधायक कैलाश गहतोड़ी का कहना है कि जिले के विकास के लिए सरकार गंभीर है, जिन बुनियादी सुविधाओं की आवश्यकता है उन पर तेजी से कार्य कराया जाएगा। 23 सालों में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में कई नए कार्य हुए हैं और आगे भी होते रहेंगे। वहीं लोहाघाट विधायक पूरन सिंह फर्त्याल का कहना है कि जिले में पलायन रुके, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर कार्य हों। इसके लिए सरकार अग्रसर है। 23 सालों में जिले ने काफी विकास किया है। जिले में कई विकास कार्य प्रगति में है। उल्लेखनीय है कि चंपावत जिला पूर्व में अल्मोड़ा जिले का हिस्सा था। 1972 में यह हिस्सा पिथौरागढ़ जिले के अंतर्गत आया था। 15 सितम्बर 1997 को चंपावत तो स्वतंत्र जिला घोषित किया गया। जिला बनाओ संघर्ष समिति स्थापना दिवस पर शारीरिक दूरी का पालन करते हुए कार्यक्रम आयोजित करेगी। समिति के अध्यक्ष बसंत तड़ागी ने बताया कि कार्यक्रम में जिले के लिए आंदोलन करने वाले लोगों को सम्मानित किया जाएगा। हिन्दुस्थान समाचार-hindusthansamachar.in