उत्तराखंडः बहुचर्चित 500 करोड़ के एनएच घोटाले के सभी मामलों की सुनवाई अब एक साथ 28 अक्टूबर को
उत्तराखंडः बहुचर्चित 500 करोड़ के एनएच घोटाले के सभी मामलों की सुनवाई अब एक साथ 28 अक्टूबर को
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उत्तराखंडः बहुचर्चित 500 करोड़ के एनएच घोटाले के सभी मामलों की सुनवाई अब एक साथ 28 अक्टूबर को

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नैनीताल, 17 सितम्बर (हि.स.)। प्रदेश के बहुचर्चित करीब 500 करोड़ के एनएच-74 मुआवजा घोटाले के सभी करीब एक दर्जन मामलों की सुनवाई अब एक साथ होगी। बुधवार एवं गुरुवार को इन मामलों की सुनवाई के बाद सभी मामलों की एक साथ सुनवाई के लिए 28 अक्टूबर की तिथि नियत कर दी गई है। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी ने बताया कि मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 465, 466, 467, 468, 471 473 व 120 बी एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के अंतर्गत लगभग 112 आरोपित राजस्व अधिकारियों व कर्मचारियों, बिचौलियों व काश्तकारों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल हो चुके है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश इस मामले की भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम अदालत में 28 अक्टूबर को अब एक साथ सुनवाई करेंगे। एनएच के अधिकारियों को बचाया ! एसआईटी की जांच पर भी सवाल उल्लेखनीय है कि इस बहुचर्चित घोटाले की तत्कालीन कुमाऊं मंडलायुक्त डी सेंथिल पांडियन ने मार्च 2017 में मामला संज्ञान में आने के बाद जांच कराई गई। उसके बाद ऊधमसिंह नगर जिले के तत्कालीन एडीएम प्रताप शाह के माध्यम से राजस्व अधिकारियों, कर्मचारियों, बिचौलियों व काश्तकारों के साथ ही एनएच के अधिकारियों के फिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इस पर गठित एसआईटी की जांच में एनएच के अधिकारियों सहित सभी आरोपितों द्वारा 500 करोड़ का घोटाला किये जाने की बात कही गई थी, किंतु एक भी एनएच के अधिकारी इस मामले में आरोपित नहीं किये गए हैं। मामले में संबंधित काश्तकारों की कृषि भूमि को पुरानी तिथि में 143 की कार्रवाई कर पुरानी तिथियों पर अकृषि दिखाते हुए भारी लाभ पहुंचाया गया, जबकि कुछ काश्तकारों को कृषि भूमि के रूप में ही भुगतान किया गया। इस पर भी सवाल उठते रहे हैं। इधर अधिकांश आरोपितों को न्यायालय में उन पर लगे आरोपों पर आरोपित भी कर दिया गया है एवं उनसे संबंधित पत्रावलियां अभियोजन साक्ष्य हेतु नियत की गई हैं।अधिकांश मामलों में एसआईटी द्वारा 41क जाब्ता फौजदारी का नोटिस देकर गिरफ्तार किये बिना आरोप पत्र पेश कर दिया गया है। कुछ काश्तकारों के बारे में यह भी रिपोर्ट है कि वह विदेशों में हैं या फरार हैं। लिहाजा गिरफ्तारी नहीं हो पा रही हैं। इस बीच प्रवर्तन निदेशालय ने आरोपित काश्तकारों की करीब 11.6 करोड़ की संपत्ति जब्त कर ली है। ऐसे में लोग सवाल उठा रहे हैं कि एसआईटी की जांच एजेंसियों ने यह कार्रवाई क्यों नहीं की। यदि उनके द्वारा यह कार्रवाई की जाती तो फरार काश्तकार भी आज गिरफ्त में होते। हिन्दुस्थान समाचार/नवीन जोशी-hindusthansamachar.in