अर्थपूर्ण हैं संविधान में अंकित चित्र : राज्यपाल
अर्थपूर्ण हैं संविधान में अंकित चित्र : राज्यपाल
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अर्थपूर्ण हैं संविधान में अंकित चित्र : राज्यपाल

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ओम प्रकाश कोलकाता, 20 दिसम्बर (हि.स.)। "भारतीय संविधान में अंकित चित्र संविधान निर्माताओं की दूरदर्शिता का संकेत देते हैं। संविधान जिन मर्यादाओं से बँधा हुआ है उसका भी महत्व है अत: उसकी मूल भावना को चुनौती देना अनुचित है।" यह कहना है पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ का, जो स्थानीय रथीन्द्र मंच में श्री बड़ाबाजार कुमारसभा पुस्तकालय द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में "भारतीय संविधान में अंकित चित्रों की पृष्ठभूमि एवं भावार्थ' विषय पर अध्यक्षीय वक्तव्य रख रहे थे। धनखड़ ने जोर देकर कहा कि संविधान की आत्मा से छेडछाड़ करने का किसी को अधिकार नहीं हैं। जिसने भी उसे चुनौती देने का प्रयास किया है, वह मिट गया है। धनखड़ ने कुमारसभा पुस्तकालय की गतिविधियों की प्रशंसा करते हुए उसके भव्य भवन की संकल्प-पूर्ति पर जोर दिया। राज्यपाल ने पुस्तकालय के भवन हेतु 21 लाख रुपये की अनुदान की घोषणा की, जिसका उपस्थित जन समूह ने तुमुल हर्षध्वनि से स्वागत किया। प्रधान वक्ता लक्ष्मीनारायण भाला ने कहा कि शब्दों का एक निर्धारित अर्थ होता है; परन्तु चित्र कई अर्थ प्रेषित करते है। संविधान निर्माताओं ने इसी भावना से विकास भारती के चित्रकार नन्दलाल बोस से सम्पर्क किया। उन्होंने गहन अध्ययन करने के बाद चित्रों का चयन एवं अंकन किया। चित्रों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि संविधान के हर भाग का जो विषय है उसी विषय का उद्गम अथवा परिणाम बताने वाले चित्र उन्होंने अंकित किये। उन्हें देखकर ऐसा लगता है मानों चित्र कोई संदेश दे रहे हों। उन्होंने संविधान के 22 भागों में अंकित 28 चित्रों का विस्तार से विवेचन किया। कार्यक्रम के प्रधान अतिथि वरिष्ठ आयकर सलाहकार सज्जन कुमार तुल्स्यान ने कहा कि संविधान की मूल प्रति पर उकेरे गये चित्र उसकी आत्मा को प्राणवन्त बनाते हैं। कुमारसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को स्मरण करते हुए बताया कि वे भारतभूमि को राष्ट्र पुरुष मानते थे। डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि संविधान उस राष्ट्र पुरुष का ह्मदय है। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. अरुण प्रकाश अवस्थी रचित भारत वन्दना "प्यारा हिन्दुस्तान हमारा' की संगीतमय प्रस्तुति से हुआ, जिसे स्वर दिया लोकप्रिय गायक ओम प्रकाश मिश्र ने। मंच पर राज्य की प्रथम महिला सुदेश धनखड़ की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। डॉ. तारा दूगड़, अरुण प्रकाश मल्लावत, डॉ. पंकज साहा ने शॉल ओढ़ाकर अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन किया पुस्तकालय के मंत्री महावीर बजाज ने, धन्यवाद ज्ञापन किया साहित्य मंत्री बंशीधर शर्मा ने। इस अवसर पर राज्यपाल धनखड़ ने आई. आई. टी. खड़गपुर के वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी डॉ. राजीव रावत की नवीनतम पुस्तक "हमारे दरमियां' का लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम में हिंगलाजदान रत्नू, प्रकाश बेताला, भागीरथ चांडक, डॉ. बिन्देश्वरी प्रसाद सिंह, डॉ. ऋषिकेश राय, डॉ. अभिजीत सिंह, शार्दूलसिंह जैन, प्रभाकर तिवारी, अनिल ओझा नीरद, रविप्रताप सिंह, नन्दलाल सिंघानिया, घनश्याम चौरसिया, किशन झंवर, महावीर रावत, राजकुमार व्यास, शैलेष बागड़ी, स्नेहलता बैद सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। साथ ही फेसबुक, यूू ट्यूब जैैैसे आभासी (वर्चुअल) माध्यम से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। हिन्दुस्थान समाचार-hindusthansamachar.in