अब-तो-जागो-(कविता)
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अब तो जागो (कविता)

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कवियत्री ने इस कविता के माध्यम से यह बताया है कि चुनाव का खेल अब खत्म हो चुका है। अब मानवता की पुकार सुनों। कवियत्री ने इस कविता में बताया है कि जो लोग तड़प रहे हैं उन्हें बचाने की कोशिश करो। किसी को मिले नहीं भोजन जिसे मिले उसके क्लिक »-www.prabhasakshi.com