अब खाली पड़ी सरकारी भूमि पर पेड़ लगाने व काटने का मिलेगा अधिकार
अब खाली पड़ी सरकारी भूमि पर पेड़ लगाने व काटने का मिलेगा अधिकार
देश

अब खाली पड़ी सरकारी भूमि पर पेड़ लगाने व काटने का मिलेगा अधिकार

news

खाली पड़ी सरकारी जमीनों पर अपनी जरूरत के हिसाब से पेड़ लगाने और उसके स्वामित्व का अधिकार मिलेगा। कृषि वानिकी योजना के तहत कृषि योग्य भूमि पर भी पेड़ों की खेती करने का हक मिलेगा। सरकार ने राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति के तहत एग्रोफारेस्ट्री उपमिशन लॉन्च किया है। इससे किसान अपने खेतों पर फसलों के साथ पेड़ लगाकर अतिरिक्त आमदनी कर सकता है। इस बाबत सभी राज्यों को कानून में उपयुक्त संशोधन कर इसे लागू करने की सलाह दी गई है। कुछ राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में इसे लागू कर दिया गया है, जिसे और विस्तार देने के लिए सरकारी मदद मुहैया कराई जा रही है। इसमें भूमिहीन खेतिहर मजदूरों को भी शामिल किया गया है। उन्हें खाली पड़ी सरकारी जमीनों पर पेड़ लगाने और उन पेड़ों का मालिकाना हक देने का प्रावधान भी है। कृषि मंत्रालय के एक आंकड़े के मुताबिक, देश में फिलहाल डेढ़ करोड़ हेक्टेयर भूमि पर सामाजिक वानिकी योजना के तहत पेड़ लगाये गये हैं। वहीं, देश में सामाजिक वानिकी का रकबा बढ़ाने की पर्याप्त संभावना के मद्देनजर सरकार इसे और विस्तार देना चाहती है। एग्रोफारेस्ट्री उप-मिशन के तहत ‘मेड़ पर पेड़’ लगाने के उत्साहजनक नतीजे मिलने लगे हैं। इसके तहत उन पेड़ों को लगाया जा सकेगा, जो घरेलू स्तर पर जलाने के काम आती है। इसके साथ लकडि़यों की दैनिक जरूरतों को पूरा करने में जल्दी तैयार होने वाले पेड़ों की बहुत आवश्यकता महसूस की जा रही है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और वन विभाग के अनुसंधान संस्थानों में देश के अलग-अलग एग्रो क्लाइमेटिक जोन के हिसाब से लगाये जाने वाले पेड़ों की पहचान की जा रही है। उप-मिशन के तहत पौध नर्सरी, हरा चारा, पेड़ों की पत्तियों से तैयार होने वाली कंपोस्ट खाद और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने वाले पेड़ों की खेती की जा रही है। इससे किसानों को अतिरिक्त आमदनी के साथ पर्यावरण के लिए कई तरह के लाभ हैं। इमारती लकडि़यों वाले पेड़ तैयार होने में समय लेते हैं, जबकि कागज उद्योग, बायो फ्यूल उत्पादन, पेड़ों से निकलने वाले खाद्य तेल, लाख, सिल्क और जड़ी बूटी के साथ सुगंध देने वाले पौधे और पेड़ जल्दी तैयार किए जा सकते हैं। इन सारे पेड़ों की खेती के लिए ही कृषि वानिकी नीति तैयार की गई है।-newsindialive.in