अनुसंधान करने के लिए वैज्ञानिक करें मंथन: डॉ. हर्ष वर्धन
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अनुसंधान करने के लिए वैज्ञानिक करें मंथन: डॉ. हर्ष वर्धन

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- सीएसआईआर-आईआईएमटी ने 57वां स्थापना दिवस मनाया विजयलक्ष्मी नई दिल्ली, 08 अक्टूबर (हि.स.)। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर)-खनिज और पदार्थ प्रौद्योगिकी अनुसंधान (आईएमएमटी) भुवनेश्वर में आज वर्चुअल माध्यम से अपना 57वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर केन्द्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन मुख्य अतिथि और सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. शेखर सी. मांडे सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित थे। सीएसआईआर-आईएमएमटी के निदेशक प्रोफेसर एस. बसु, स्थापना दिवस समारोह समिति के अध्यक्ष डॉ. ए.के. साहु, कई वैज्ञानिक, अधिकारी और कर्मचारी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से उपस्थित रहे। बता दें कि आईएमएमटी, सीएसआईआर नई दिल्ली की एक प्रमुख राष्ट्रीय प्रयोगशाला है। इस संस्थान का कार्य खनिज, पदार्थ और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के दोहन की संभावना का पता लगाना है। इसका गठन क्षेत्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला भुबनेश्वर के रूप में 1964 में किया गया। 13 अप्रैल, 2017 को इसे नया कार्यादेश, विजन और फोकस देकर इसका नाम खनिज और पदार्थ प्रौद्योगिकी संस्थान कर दिया गया। डॉ. हर्ष वर्धन ने स्थापना दिवस के अवसर पर सीएसआईआर-आईएमएमटी को बधाई दी और व्यर्थ पदार्थों को वेल्थ में वैज्ञानिक तरीके से बदलने के लिए वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि विज्ञान के पास मानव द्वारा महसूस की जा रही प्रत्येक समस्या का समाधान निकालने की क्षमता है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों ने प्रत्येक अवसर पर सदैव कठिन परिश्रम किया है। उन्होंने देश में विभिन्न संस्थानों में कोविड-19 से निपटने के लिए नवाचार-विचार और उत्पाद विकसित करने के लिए वैज्ञानिकों के उल्लेखनीय योगदान का स्मरण कराया। डॉ. हर्ष वर्धन ने लोगों के जीवन में बेहतर परिवर्तन लाने के लिए नये विजन, पुनःसोच, पुनःडिजाइन और अनुसंधान करने के लिए वैज्ञानिकों का मंथन करने का आह्वान किया। डॉ. शेखर मांडे ने इस वर्ष के प्रारंभ में सुपर चक्रवाती तूफान अंफान के दौरान लोगों की दिक्कतों को दूर करने में सीएसआईआर-आईएमएमटी के योगदान को उजागर किया। यह कार्य विशेष रूप से जल शुद्धिकरण आदि से संबंधित विभिन्न प्रौद्योगिकियों के बल पर किया गया। उन्होंने कहा कि आईएमएमटी ने पेयजल और औद्योगिक जल के स्रोतों की रासायनिक और जैविक जांच के लिए एनएबीएल प्रत्यायित केन्द्र स्थापित किया है। आईएमएमटी का वाटर फिल्ट्रेशन मीडिया जिसे टेराफिल कहा जाता है, जल उपचार प्रौद्योगिकी के लिए बहुत कम लागत का समाधान प्रदान करता है। उन्होंने महामारी की स्थिति से निपटने के लिए अस्पताल सहायक उपकरणों और पीपीई, बिना छूए हाथ धोने और हाथ सेनेटाइजेशन उपकरण, तरल हैंड सेनेटाइजर, एंटी वायरल स्प्रे मशीन आदि विकसित करने में संस्थान की भूमिका की सराहना की। इन उत्पादों की प्रौद्योगिकी के लाइसेंस विभिन्न सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यमों को दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि आईएमएमटी राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत ओडिशा के आकांक्षी जिले नवरंगपुर में सामाजिक आर्थिक विकास कार्यक्रम में विज्ञान और प्रौद्योगिकी आधारित बहु-प्रयोगशाला कृषि हस्तक्षेप में अग्रणी है। हिन्दुस्थान समाचार-hindusthansamachar.in