कोरोना संक्रमण से सामना करने के लिए आत्मबल बनाएं रखें, मनोबल कमजोर न करें : राज्‍यपाल

कोरोना संक्रमण से सामना करने के लिए आत्मबल बनाएं रखें, मनोबल कमजोर न करें : राज्‍यपाल
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राज्यपाल ‘‘आदिवासी समाज सम्पूर्ण भारत के तत्वाधान में कोरोना जागरूकता विषय’’ पर आयोजित वेबिनार में शामिल हुई रायपुर, 23 मई (हि.स.)। राज्यपाल अनुसुईया उइके रविवार को आदिवासी समाज सम्पूर्ण भारत के तत्वाधान में कोरोना जागरुकता विषय पर आयोजित वेबिनार में शामिल हुई। राज्यपाल ने वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण से सामना करने के लिए अपना आत्मबल बनाएं रखें और मनोबल कमजोर नहीं करना है, बल्कि उससे लड़ना है, निश्चित ही हम सफल होंगे। कोरोना का टीकाकरण प्रारंभ हो गया है। परंतु इस संबंध में ग्रामीण क्षेत्रों में जनजागरुकता की आवश्यकता है। साथ ही लोगों को टीकाकरण के महत्व बताएं। टीकाकरण एक ब्रम्हास्त्र है। टीकाकरण से पहले चिकित्सक द्वारा जो निर्देश दिए हैं, उसका अवश्य पालन करें। वैक्सीन लगाने के बाद भी सावधानी बरतें, मास्क पहने, हाथ धोते रहें और सामाजिक दूरी का पालन अवश्य करें। राज्यपाल ने कहा कि हमारे देश एवं प्रदेश कोरोना संक्रमण से गुजर रहा है, जिससे समाज के सभी वर्ग प्रभावित है। पहले यह केवल शहरों तक सीमित था, लेकिन यह इस बार गांव तक पहुंचा है और यह आदिवासी बाहुल्य इलाकों में भी पहुंचा है और लोग संक्रमित भी हुए हैं। राज्यपाल ने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति का पूजक रहा है और प्रकृति के अनुरूप जीवन-यापन करता है। वहां पर कई वनौषधि पाई जाती है, जिसका ज्ञान आदिवासियों को होता है। ऐसे वनोपज-वनौषधि को दैनिक जीवन में उपयोग करने के कारण उनमें स्वाभाविक रूप से रोगप्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, यही कारण है कि वहां उस गंभीर स्थिति में नहीं पहुंचे, जो शहरों और शहरों से लेकर गांवों में जो स्थिति देखने को मिली। राज्यपाल ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में टीकाकरण को लेकर वहां पर कई भ्रांतियां है और कहीं-कहीं तो परीक्षण कराने से भी पीछे हटते हैं। इसके लिए आदिवासी समाज के प्रमुखों, पंच-सरपंचों के सहयोग की आवश्यकता है। मैं उनसे आग्रह करती हूं कि वे अपने समाज के बीच जाए और आदिवासी समाज को समझाए, मास्क का सहीं ढंग से उपयोग करना सीखाएं, हाथ धोना और सामाजिक दूरी का पालन करने की जानकारी दें। उन्हें प्रारंभिक लक्षण आने पर दवाईयां लेना शुरू कराएं। हम इसके लिए स्थानीय भाषाओं के माध्यम से मुनादी करा सकते हैं। साथ ही वॉल पेंटिंग के माध्यम से स्थानीय भाषाओं में संदेश दे सकते हैं। राज्यपाल ने कहा कि आदिवासी समाज के पढ़े-लिखे युवाओं से आग्रह है कि वे अपने गांवों में सावधानी रखते संपर्क करें और यह बताएं कि कोई सरकारी कर्मी टीकाकरण के लिए आता है तो उनका सहयोग करें और आगे बढ़कर टीका लगवाएं। याद रखें कि अभी टीकाकरण और मास्क का उपयोग ही इससे बचने का प्रमुख साधन है। यदि हम इसे अपनाएंगे तो निश्चित ही कोरोना से मुक्ति पाएंगे। हिन्दुस्थान समाचार/चंद्रनारायण शुक्ल