पापा तथा बाधाओं के नाश लिए करें मां चंद्रघंटा की आराधना Hindi Latest News 

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पापा तथा बाधाओं के नाश के लिए करें मां चंद्रघंटा की  आराधना

पापा तथा बाधाओं के नाश के लिए करें मां चंद्रघंटा की आराधना

पापा तथा बाधाओं के नाश के लिए करें मां चंद्रघंटा की आराधना जम्मू, 26 मार्च, (हिस) । मां दुर्गा की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व है और इस दिन इन्हीं के विग्रह का पूजन आराधना किया जाता है। तृतीय नवरात्र मैं मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप चंद्रघंटा की आराधना

से पाप तथा बाधाओं का नाश होता है । मां चंद्रघंटा की कृपा से अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते है, दिव्य सुगंधिओं का अनुभव होता है तथा विविध प्रकार की दिव्य ध्वनियां सुनाई देती हैं। यह क्षण साधक के लिए अत्यंत सावधान रहने का होता है। मां चंद्रघंटा का स्वरूप : मां चंद्रघंटा का स्वरूप परम शांति दायक और कल्याणकारी है इनके मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र है। इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। यह अर्धचंद्र मां चंद्रघंटा का तृतीय नेत्र है जो सदैव खुला रहता है तथा दुष्टों का नाश करता है। इनके शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है इनके दस हाथ हैं इनके दसों हाथों में खड्ग आदि शस्त्र तथा बाण आदि अस्त्र विभूषित हैं। इनका वाहन सिंह है और इनकी मुद्रा युद्ध के लिए उद्यत रहने की होती है। बुराई का नाश तथा अपने भक्तों की रक्षा के लिए यह सदैव तत्पर रहती हैं। अभीष्ट फल देती है चंद्रघंटा : मां चंद्रघंटा अभीष्ट फल प्रदान करने वाली हैं। इनकी कृपा से साधक के समस्त पाप और बाधाएं नष्ट हो जाती हैं। इनकी आराधना से मां भक्तों के कष्ट का निवारण शीघ्र ही कर देती है। इनका उपासक सिंह की तरह पराक्रमी और निर्भय हो जाता है। इनके घंटे की ध्वनि सदा अपने भक्तों को प्रेत बाधा से रक्षा करती है। इनका ध्यान करते ही शरणागत की रक्षा के लिए इस घंटे की ध्वनि निर्धारित हो उठती है। मां का स्वरूप अत्यंत सौम्यता एवं शांति से परिपूर्ण रहता है। इनकी आराधना से वीरता निर्भयता के साथ ही सौम्यता एवं विनम्रता का विकास होकर मुख, नेत्र तथा संपूर्ण काया में कांति गुण की वृद्धि होती है। स्वर में दिव्य अलौकिक माधुर्य का समावेश हो जाता है। मां चंद्रघंटा के भक्त और उपासक जहां भी जाते हैं लोग उन्हें देखकर शांति और सुख का अनुभव करते हैं। मां के आराधक के शरीर से दिव्य प्रकाश युक्त परमाणुओं का अदृश्य विकिरण होता रहता है। यह दिव्य क्रिया साधारण चक्रों से दिखाई नहीं देती किंतु साधक और उसके संपर्क में आने वाले लोग इस बात का अनुभव भलीभांति करते रहते हैं। मां चंद्रघंटा की कथा : माता पार्वती का वह रूप जिसमें वह तप और योग करते हुए शिव जी को प्राप्त करना चाहती है वह ब्रह्मचारिणी है। भगवान शिव ने पार्वती को वचन देते हुए कहा कि वह पार्वती जी से विवाह करेंगे जिसके बाद शिवजी अपने विवाह के अवसर पर माता पार्वती को लेने उनके घर पहुंचे। उनके साथ देवता, नश्वर, भूत, तपस्वी, अघोरी, प्रेत, पिशाच डाकनिया, शिवगण आदि का जुलूस भी आया। शिव एक आतताई के रूप में माता पार्वती के पिता राजा हीमावन के महल पहुंचे। पार्वती की मां मैनावती देवी उनके भयानक स्वरूप को देखकर बेहोश हो गई। पार्वती शिव को देखती हैं और उनके डरावने रूप को देखकर अपने माता-पिता तथा परिवार के अन्य सदस्यों को बचाने के लिए वह खुद को देवी चंद्रघंटा में बदल लेती हैंजिसके बाद मां चंद्रघंटा ने शिव को आकर्षक रूप में प्रकट होने के लिए राजी किया। देवी की बात सुनने पर शिव अनगिनत रत्नों से सुशोभित एक राजकुमार के रूप में प्रकट हुए। इसके बाद माता पार्वती अपने माता-पिता व समस्त परिजनों को मूर्छित अवस्था से उठाती हैं फिर माता पार्वती व शिवजी का विवाह पूर्ण होता है। कैसे करें मां चंद्रघंटा की आराधना वह पूजा : मां चंद्रघंटा की पूजा करने के लिए सर्वप्रथम सिंह पर सवार दस हाथ वाली माता दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें जिनके मस्तक पर अर्धचंद्र बना हो। इनके दो हाथ में त्रिशूल, गदा, धनुष-बाण, खडग, कमल, घंटा और कमंडल हो तथा एक हाथ खाली हो जिसमें वह आशीर्वाद मुद्रा या अभय मुद्रा में हों। इसी के साथ आवाहन मंत्रों से उनको घर बुलाना चाहिए। उनको बैठने के लिए सुंदर आसन दें। इसके बाद उनके पैर धुलाकर, हाथ धुलाकर कर आचमन करवा कर स्नान करवाएं। फिर दूध, दही, घी, शहद, शकर, गंध इत्यादि से स्नान करवाकर श्वेत वस्त्र पहनाए। गंध लगाकर पुष्पमाला अर्पित करें। सुगंधित द्रव्य देकर धूप और दीप दिखाएं। खाने के लिए भोजन, फल, तांबूल तथा दक्षिणा देकर माता की पूजा करें। फिर माता की आरती कर के स्तुति करें तथा वह आरती सब लोग वंदन करें। इसके पश्चात माता चंद्रघंटा के चरणों में नमस्कार करें। माता चंद्रघंटा द्वारा ग्रहण किया गया प्रसाद सब भक्तों में बांटे। ऐसा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। संभव हो तो ज्ञानी भक्त दुर्गा सप्तशती का पाठ भी करें। इससे अभीष्ट वर प्राप्त होता है। हिंदुस्थान समाचार / राहुल / बलवान
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