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पश्चिम-बंगाल

ममता जेल से डरती हैं : दिलीप घोष

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कोलकाता, 22 फ़रवरी (हि. स.)। डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी की पत्नी को सीबीआई नोटिस भेजने पर बंगाली राजनीति में विवाद छिड़ गया है। इसी मुद्दे पर, राज्य के भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के हालत की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि उन्हें जेल का डर है। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद को जेल से इतना शुगर हुआ है कि वे रोटी, चावल नहीं खा सकते हैं। इनके पास भी यह अवसर आएगा। अभी तो सीबीआई का हाथ पहुंचा है। दरअसल ममता ने रविवार को एक मातृभाषा दिवस कार्यक्रम में कहा कि वह बिल्ली और चूहों से नहीं डरती हैं। यदि उन्हें जेल भेजना है, जेल भेज दें। वहां से भी लड़ाई करेंगी। उन्होंने कहा कि 21 में खेला होगा। कौन हारेगा, कौन जीतेगा। उन्हें जेल भी भेज दें, तो जेल से बंगबंधु की तरह आवाज उठाएंगी। मुझे हरा नहीं पाएंगे। हमें बचना होगा। हमें लड़ना होगा बंगाल की संस्कृति और सभ्यता को कोई तोड़ नहीं पाएगा। सोमवार को इसके जवाब में दिलीप घोष ने कहा कि उन्हें जेल का डर हैं। लालू प्रसाद जेल से जीत गए हैं? देखिए जब जेल में रहने पर क्या होता है। उन्हें तो हमने (लोकसभा में) 18 सीटों से हराया है इस बार 200 सीटों से हराएंगे। उन्होंने ममता को बिल्ली कहते हुए कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि मुझे पता है कि उनमें कितना साहस है। सभी घरों में चला जाएगा। अब बाघ नहीं है, वह एक बिल्ली बन गयी है। यह सब कहकर वे किसे धमका रही हैं? साधारण लोग जानते हैं कि उसका वास्तविक चरित्र क्या है? इस बीच, दिलीप ने यह भी कहा कि नोआपाडा-दक्षिणेश्वर मेट्रो के उद्घाटन में ममता की अनुपस्थित को लेकर उन्होंने कहा कि हम शिष्टाचार जानते हैं, हम प्रोटोकॉल जानते हैं। राज्य में जितने भी सरकारी कार्य होते है उसमें सभी विपक्ष को नहीं बुलाया जाता है। लेकिन हम हमेशा मुख्यमंत्री को बुलाते है। हम स्थानीय जनप्रतिनिधियों को बुलाते हैं। हालांकि वे आने की हिम्मत नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि यहां, सरकार एक पार्टी की सरकार बन जाती है। मैं एक विधायक था, अब मैं एक सांसद हूं। मुझे किसी भी सरकारी समारोह में आमंत्रित नहीं किया जाता है। उन्हें हमसे सीखने की जरूरत है। ममता बनर्जी राजनीति और समाज को अलग-अलग नहीं समझती हैं। वह केवल दल समझती हैं। दूसरी ओर, पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत कम करने की राज्य की पहल के बारे में, दिलीप घोष ने कहा कि वह बहुत अच्छा है। हालांकि, यह मतदान के लिए नहीं होना चाहिए। लोगों की पीड़ा के बारे में सोचकर कीमत कम की जानी चाहिए। हिन्दुस्थान समाचार/सुगंधी/गंगा

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