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पश्चिम-बंगाल

हाईकोर्ट ने लगाई प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति पर रोक

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कोलकाता, 22 फरवरी (हि.स.)। कलकत्ता हाई कोर्ट ने 2014 और 2016 के प्राथमिक शिक्षकों (टीईटी) की नियुक्ति पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति राजर्षि भारद्वाज की एकल पीठ ने सोमवार को मामले के निपटारे तक यह स्थगन लागू रहने के आदेश दिए। दरअसल, प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान मेरिट सूची गड़बड़ी करने का आरोप कई उम्मीदवारों ने कोर्ट में लगाया था। सोमवार को कोर्ट ने सुनवाई के बाद कहा कि जब-तक मामले का निस्तारण नहीं हो जाता है, तब-तक शिक्षक नियुक्ति पर स्थगन आदेश लागू रहेगा। इस मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद फिर होगी। नतीजतन, जिन लोगों को नियुक्ति पत्र मिला है, वे अब प्रभावी नहीं होंगे। आरोप है कि कई उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र भेजे गए हैं, जिनके नाम मेरिट सूची में नहीं थे। इसके अलावा, इस सूची काफी गड़बड़ी है। कोर्ट के आदेश के बाद सीपीएम नेता सुजन चक्रवर्ती ने कहा कि यह राज्य सरकार सिर से लेकर पैर तक भ्रष्टाचार में लिप्त है। भाजपा नेता जयप्रकाश मजूमदार ने कहा कि पिछले 10 वर्ष से यह सरकार शिक्षा प्रणाली पर काम कर रही है। कई बच्चों का भविष्य बर्बाद हो गया है। भ्रष्टाचार के चलते इस सरकार ने अपने लोगों को नौकरी देकर अनियमितताएं बरती हैं। उल्लेखनीय है कि ममता सरकार ने 2014 में प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति के लिए परीक्षा कराई थी, लेकिन मेरिट लिस्ट जारी होने के बाद भी किसी की नियुक्ति नहीं हो सकी थी। इस बीच 11 दिसंबर 2020 को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 16,500 प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की थी। 23 दिसंबर को अधिसूचना जारी की गई। भर्ती और साक्षात्कार प्रक्रिया 10 से 16 जनवरी तक चली थी। उसके बाद 15 फरवरी को मेरिट सूची प्रकाशित की गई थी। लेकिन इसमें अनियमितताओं के चलते कई उम्मीदवारों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हिन्दुस्थान समाचार / ओम प्रकाश

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