कोरोना पीड़ितों के लिए फरिश्ता बना दिव्यांग युवक

कोरोना पीड़ितों के लिए फरिश्ता बना दिव्यांग युवक
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कोलकाता, 22 मई (हि.स.)। कहते हैं, दिव्यांगता मनुष्य को शारीरिक तौर पर कमजोर बना देता है। पर जिनके हौसलों में दम और आत्मविश्वास मजबूत हो, उन्हें कौन मात दे सकता है। ऐसे ही हैं दक्षिण 24 परगना के जीवनला थाना अंतर्गत मठेरदिघी के 33 वर्षीय खोकन मंडल। कोरोना संकट में खोकन मंडल कोरोना पीड़ितों की मदद कर रहे हैं खोकन तीन साल की उम्र में ही पोलियो के चलते दोनों पैर से विकलांग हो गये थे। बड़े होने पर उन्हाेंने बैसाखी के सहारे चल कर इंसानियत की हर परीक्षा में सफल रहे। परिवार में भाइ बहनों का खर्च उठाते हुए उन्होंने बीए तक की पढ़ाई की और उसके बाद नेताजी सुभाष ओपन यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ सोशल वर्क में एमए की डिग्री ली है। अब मिशनरी ऑफ चैरिटी में साइकोलॉजिकल काउंसलर के पद पर कार्यरत हैं। कोरोना संकट के समय में खोकन मंडल कोरोना संक्रमण से जान गंवाने वालों के परिवार 15 दिन की आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं। इसके अलावा वह प्रतिदिन अपनी टीम के अन्य सदस्यों के साथ कैनींग और तालडी के रेल बाजार इलाके और कैनिंग महकमा अस्पताल के आसपास घूमकर महामारी से संक्रमित लोगों को ढूंढते हैं और उन्हें भोजन और अन्य जरूरत की चीजें उपलब्ध कराते हैं। इनकी टीम में न्यूटन, अर्पण, छाया शुभो जैसे कई अन्य लोग हैं, जो निशब्द तरीके से कोरोना पीड़ित लोगों की मदद में जुटे हुए हैं। हिन्दुस्थान समाचार / ओम प्रकाश/सुगंधी

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