बंगाल की नब्ज समझने में विफल रही भाजपा

बंगाल की नब्ज समझने में विफल रही भाजपा
bjp-failed-to-understand-the-pulse-of-bengal

कोलकाता, 02 मई (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी को करारी शिकस्त मिलने के बाद राज्य में तृणमूल कांग्रेस की तीसरी बार सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है। भाजपा को बाद के चार चरणों में सबसे अधिक नुकसान हुआ है। राजनीतिज्ञों का मानना है कि भाजपा बंगाल की नब्ज समझने में विफल रही है। दरअसल, लोकसभा चुनाव में 18 सीटें जीतने के बाद भारतीय जनता पार्टी काे विधानसभा चुनाव में अच्छी सफलता मिलने की उम्मीद थी। अगर मतदान प्रतिशत का विश्लेषण किया जाए तो चौथे चरण के बाद जिन सीटों पर वोटिंग हुई है, वहां भारतीय जनता पार्टी को करारी शिकस्त मिली है। इस चरण के साथ ही पूरे देशभर के साथ बंगाल के लोगों में भी कोरोना को लेकर हाहाकार मचा था। लोग लगातार सवाल उठा रहे थे कि कोरोना से निपटने की बजाय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा के अन्य बड़े नेता बंगाल में आकर चुनावी भोंपू बजा रहे थे। राजनीतिज्ञों का मानना है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बराबर लोकप्रिय चेहरा भारतीय जनता पार्टी के पास नहीं था। चुनाव से पहले पार्टी के कई बड़े रणनीतिकारों ने सलाह दी थी कि राज्य में मुख्यमंत्री का चेहरा प्रोजेक्ट किया जाना चाहिए लेकिन भाजपा ने मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ा जिसकी वजह से बंगाल के मतदाताओं के बीच यह संदेश गया कि भाजपा के पास योग्य उम्मीदवार नहीं है। राजनीतिक विशेषज्ञों के एक धड़े का यह भी मानना है कि बंगाल में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का माहौल बनाने का प्रयास किया गया। दलबदल करने वाले नेताओं को लेकर ममता बनर्जी ने इस तरह से प्रोजेक्ट किया कि उनके अपनों ने ही उन्हेंं धोखा दिया क्योंकि वे खुद बेईमान थे। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि ममता के इस दांव से उन्हेंं फायदा मिला। विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल में जमीनी आधार बनाने के लिए भाजपा ने दूसरे दलों के नेताओं को पार्टी शामिल कराका उन्हेंं टिकट देने से भी पार्टी ने अपने नेताओं की नाराजगी मोल ले ली। उल्लेखनीय है कि टिकट बंटवारे के दौरान बंगाल भाजपा यूनिट में असंतोष की खबरें आईं और कई जगह भाजपा के दफ्तर में तोडफ़ोड़ भी हुई। इससे विवश होकर भाजपा को कई बार संशोधन भी करना पड़ा। हिन्दुस्थान समाचार / ओम प्रकाश