हिंदी भाषियों को एक और तोहफा दे सकती है बंगाल सरकार, रवींद्र सरोवर पर होगी छठ पूजा की छूट
हिंदी भाषियों को एक और तोहफा दे सकती है बंगाल सरकार, रवींद्र सरोवर पर होगी छठ पूजा की छूट
पश्चिम-बंगाल

हिंदी भाषियों को एक और तोहफा दे सकती है बंगाल सरकार, रवींद्र सरोवर पर होगी छठ पूजा की छूट

news

कोलकाता, 15 सितंबर (हि. स.)। 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले हिंदी भाषियों को लुभाने में जुटी ममता बनर्जी की सरकार कोलकाता में रहने वाले बिहार, उत्तर प्रदेश के लोगों को एक और सौगात देने जा रही है। पिछले तीन सालों से कोलकाता की ऐतिहासिक रवींद्र सरोवर पर छठ पूजा रोकने के लिए कमर कसकर मैदान में उतरी ममता सरकार अब कोर्ट में यू-टर्न लेते हुए यहां छठ पूजा कराने की अर्जी लगा चुकी है। सचिवालय सूत्रों ने इसकी पुष्टि की। बताया गया है कि बंगाल सरकार चाहती है कि राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) कोलकाता के रवीन्द्र सरोवर में छठ पूजा की अनुमति दे। जो लोग बिहार-यूपी के मूल निवासी हैं, वे पूरे कोलकाता में बिखरे हुए हैं और छठ पूजा उनके लिए एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इसलिए, कोलकाता नगर विकास प्राधिकरण (केएमडीए) चाहता है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण शहर की प्रसिद्ध रवींद्र सरोवर झील में छठ पूजा अनुष्ठान करने पर प्रतिबंध को हटा दे। एनजीटी ने 17 सितंबर को छठ पूजा के संबंध में केएमडीए की समीक्षा याचिका पर सुनवाई करेगा। उल्लेखनीय है कि पर्यावरण विदों की याचिका लगाई गई थी जिसमें कहा गया था कि छठ पूजा के कारण ऐतिहासिक रवींद्र सरोवर का जल दूषित होगा और जलीय जंतुओं तथा यहां के पेड़ पौधों को भारी नुकसान हो सकता है। तदनुसार, एनजीटी ने 2018 में रवींद्र सरोवर में छठ पूजा अनुष्ठानों पर प्रतिबंध लगाने का आदेश पारित किया था। हालाँकि, प्रतिबंध को धता बताते हुए, सैकड़ों लोगों ने सरोवर के परिसर में पिछले साल नवंबर में अनुष्ठान किया था। यह तब भी हुआ था जब पश्चिम बंगाल सरकार ने वैकल्पिक स्थलों की व्यवस्था की थी। हालांकि, केएमडीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि लोगों की धार्मिक भावनाओं को नियंत्रित करना बहुत मुश्किल है। पुलिस कोई कठोर कदम नहीं उठा सकती क्योंकि महिलाओं द्वारा कार्यक्रम किया जाता है। हमने एनजीटी से इस साल प्रतिबंध को शिथिल करने की अपील की है। पूजा 20 नवंबर को आयोजित की जाएगी। दरअसल सरोवर वनस्पतियों और जीवों की सैकड़ों प्रजातियों का घर है। इसे राष्ट्रीय महत्व का स्थल घोषित किया गया। इस झील को अंग्रेजों ने 1920 के दशक में विकसित किया था और यह एक प्रकृति प्रेमियों का सबसे पसंदीदा स्थल है। हिन्दुस्थान समाचार/ओम प्रकाश/गंगा-hindusthansamachar.in